रोमिंग जर्नलिस्ट

बुधवार, 22 अप्रैल 2015

मोदी के दत्तक गांव में किसानों का मातम
-बनारस के जयापुर में बेमौसम बरसात से बर्बाद किसानों की सुध लेने राज्य सरकार को कोई अफसर नहीं पहुंचा
- इस गांव में छोटे किसानों की 70 प्रतिशत फसल हो चुकी है बर्बाद, मुआवजा तो दूर तहसीलदार भी नहीं आए
दिनेश चंद्र मिश्र
वाराणसी। बेमौसम बरसात से फसलों के बर्बाद होने पर खून के आंसू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दत्तक गांव जयापुर के भी छोटे किसान रो रहे हैं। मोदी के गोद लिए के इस गांव में गेहूं की 70 फीसदी फसल बर्बाद हो गयी है। गेंहू के साथ मटर और चना की फसल बोए किसान भी कुदरत की मार के चलते रोने को विवश है। मोदी के दत्तक गांव में फसल बर्बाद होने से किसानों के खेत से लेकर घर तक मातम पसरा है। मौसम की मार से आर्थिक घायल हुए किसानों के साथ राज्य सरकार के अफसर सौतेला व्यवहार भी कर रहे हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है आज तक बर्बाद फसलों का सर्वे करने के लिए तहसीलदार तक नहीं गए हैं।
सपा सरकार जहां प्रदेश में फसलों के नुकसान का दुबारा सर्वे करवा रही है, वहीं जयापुर में किसी राजस्व अधिकारी के न पहुंचने को लेकर गांव की प्रधान दुर्गादेवी भी बहुत चिंतित है। वह बताती है कि तीन दिन पहले लेखपाल आए और एक-दो खेत देखकर लौट गए। यहां तो किसानों की 70 प्रतिशत फसल बर्बाद हो गयी है वह अपनी रिपोर्ट में कितना नुकसान दिखाएं हैं,मालूम नहीं। वह कहती है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत भेजकर उनके गोद लिए गांव के बर्बादी के साथ अफसरों के सौतेलापन की बात जरूर बताएंगे। मोदी के गोद लिए गांव में बर्बाद किसानों का जितना गुस्सा जिले के आला अधिकारियों को लेकर है उससे कम गुस्सा जनप्रतिनिधियों को लेकर भी नहीं है। मोदी का नाम इस गांव के किसानों की मदद के लिए जनप्रतिनिधि मदद के हाथ दलीय दीवार के कारण भी नहीं बढ़ा रहे हैं।

कर्ज तो दूर,सूद देना भी संकट
मोदी के गोद लिए गांव जयापुर के छोटे किसानों की कमर को बेमौसम बरसात ने पूरी तरह तोड़ दिया है। इसी गांव के लालचंद्र,मन्नू पटेल, सेचन व झम्मन की आधी से ज्यादा फसल बरसात के कारण सड़ गई। कर्ज में डूबे इन किसानों को फसल अच्छी होने पर पुराना कर्ज चुकाकर मुक्ति पाने की आस थी, इस आस पर ब्रज पड़ गया है। इनका कहना है अब कर्ज चुकाना तो दूर  समय पर सूद देना भी एक संकट है।

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