रोमिंग जर्नलिस्ट

शुक्रवार, 17 मई 2013

खेतों के लिए बज रही है खतरे की घंटी


- प्रदेश की मिट्टी में तेजी से घटे पोषक तत्व,अपनी मिट्ïटी पहचाने अभियान ने किया सचेत 
- जीवांश कार्बन की मात्रा घटकर हुई आधी,नाइट्रोजन,फास्फोर,सल्फर,जिंक की भी हुई कमी
दिनेश चंद्र मिश्र
लखनऊ। प्रदेश की माटी अनाज तो खूब उगल रही है लेकिन वह दिन दूर नहीं जब पैदावार कम होने लगे। यह खतरा प्रदेश के कृषि विभाग को मिट्ïटी के मृदा परीक्षण के बाद नजर आ रहा है। प्रदेश के खेतों में बड़ी तेजी से पोषक तत्व घट रहे हैं। पोषक तत्वों के घटने के पीछे कारण बड़ी संख्या में किसानों द्वारा धान-गेहूं का फसल चक्र अपनाना है। धान-गेहूं का फसल चक्र ही लगातार अपनाने के कारण स्वस्थ्य भूमि के मुख्य पोषक तत्वों के साथ सूक्ष्म पोषक तत्व भी तेजी से घट रहे हैं। प्रदेश में इस समय चल रहे मिट्ïटी पहचाने अभियान के प्रथम चरण के मृदा परीक्षण रिपोर्ड कार्ड जो जारी किया गया है, उसके अनुसार सेहतमंद खेत के लिए जरूरी पोषक तत्व जीवांश कार्बन माना जाता है। जीवांश कार्बन की मात्रा ०.८ प्रतिशत होनी चाहिए, प्रदेश में अब यह घटकर ०.४ प्रतिशत रह गयी है।
मिट्टी के पोषक तत्वों की कमी के कारण प्रदेश के खाद्यान्न उत्पादन में कुछ वर्षों के दौराव ठहराव आ गया है। इस ठहराव को खत्म करने के लिए प्रदेश में खरीफ व रबी फसल अभियान के दौरान मिट्ïटी पहचाने अभियान प्रारंभ किया गया है। मृदा स्वास्थ्य के दृष्टिïकोण प्रारंभ हुए इस अभियान का पहला चरण इस वर्ष २६ अप्रैल को प्रदेशभर में चला। लगभग छह लाख मिट्ïटी के नमूने प्रदेशभर में किसान जांच कराने के लिए पहुंचे। मिट्टी के इन नमूनों का पंद्रह मई को मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किया गया। मिट्ïटी के  इन नमूनों से जो निष्कर्ष निकलकर सामने आया, उसके अनुसार जीवांश कार्बन की मात्रा जहां सभी जिलों मानक से घटकर आधी रह गयी है, वहीं अन्य पोषक तत्व भी तेजी से घटे हैं। प्रदेश के अधिकांश जनपदों में मुख्य पोषक तत्वों के साथ-साथ द्वितीय तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी कमी हो रही है। पौधों के अच्छे विकास के लिए १६ पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है जिनमें से पौधे वायु मण्डल् तथा जल से तीन पोषक तत्वा कार्बन,हाईड्रोजन तथा आक्सीन ग्रहण करते हैं एवं १३ पोषक तत्व भूमि से ग्रहण करते हैं। भूमि से जो प्रमुख पोषक तत्व पौधे ग्रहण करते हैं वह है नाइट्रोजन,फास्फोरस,पोटास के अलावा द्वितीयक पोषक तत्व कैल्सियम,मैज्निश्सियम,सल्फर तथा सूक्ष्म पोषक तत्व जिंक, आयरन, मैज्नीज,कापर,बोरान,मालिब्डेनम एवं क्लोरीन भूमि से ग्रहण करते हैं।
प्रदेश में मिट्टी पहचाने अभियान के प्रथम चरण के नमूनों से जो निष्कर्ष निकले हैं वह खेतों के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं है। प्रदेश के खेतों में जहां जीवांश कार्बन की मात्रा घटकर आधी रह गयी है, वहीं अधिकांश जिलों में नत्रजन,फास्फोरस,सल्फर,जिंक,लोहा, तांबा, मैज्नीज आदि महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की भूमि में कमी दिख रही हैं। प्रदेश के खेतों महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की कमी के पीछे अधिकांश किसानों द्वारा धान-गेहूं की फसल लगातार बोने के साथ रसायनिक उर्वरकों के असंतुलित प्रयोग कारण ऐसा हो रहा है। प्रदेश में इस वर्ष सरकार ने ४० लाख २० हजार मृदा नमूनों की जांच का लक्ष्य रखा है। पहले चरण का परिणाम जहां खेतों के लिए खतरे की घंटी बजा  रहे हैं, वहीं दूसरे चरण में जो नमून जांच के लिए एकत्र होने के बाद परीक्षण किए जा रहे , वह क्या कहेंगे? इसका पता तीस मई के बाद चलेगा।

1 टिप्पणी:

ajay mishra ने कहा…

mishra ji: i got your message on twitter but i was unable to reply because twitter only lets message exhange between followers.. anyway, my number is 09415104042.. thanks

इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.