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मंगलवार, 8 जनवरी 2013

सियासी सडक़ पर मुलायम का ठोस कदम

सियासी सडक़ पर मुलायम का ठोस कदम
दिनेश चंद्र मिश्र 
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानमण्डल के १२५ वर्ष पूरे होने पर आयोजित उत्तरशती रजत जयंती समारोह के समापन के साथ मीन-मेख निकालने वाले भले ही कुछ कहें लेकिन भविष्य पर नजर रखने वाले सियासत की सडक़ पर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के ठोस कदम की थाप सुन रहे हैं। राजनीति की जिस रोड पर मुलायम सिंह यादव ने कदम रखा है, वह दिल्ली जाती है। कुश्ती के अखाड़े में कभी चरखा दांव चलकर एक से एक पहलवानों को चित्त करने में महारथ हासिल मुलायम ने भविष्य की सियासी सडक़ पर जिस तरह यह सियासी कदम की छाप छोड़ी है, उससे उनके विरोधी जहां भयभीत है, वहीं उनके ऊपर मुरीद होने वाले सियासी खिलाडिय़ों की संख्या कई गुना बढ़ गयी है। दलों की दीवार तोडक़र मुलायम की तारीफ में दिल से कसीदे पढऩे वाले तीन दिनी समारोह के दौरान विधानमंडल के भीतर से लेकर सडक़ तक कई गुना बढ़ गये हैं।
जिस विधानसभा में राजर्षि पुरूषोत्तम दास टण्डन, गोविन्द वल्लभ पंत, चन्द्रभानु गुप्ता, चौधरी चरण सिंह, बाबू बनारसी दास,हेमवती नंदन बहुगुणा,नारायण दत्त तिवारी जैसे लोग रहें, जो अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण नजीरें कायम की। उसी विधानसभा में मुलायम सिंह यादव की इच्छा का सम्मान करते हुए उनके मुख्यमंत्री पुत्र अखिलेश यादव ने इस समारोह को जो ऊंचाई दी, उसके कायल होने वालों की तादाद में रिकार्ड इजाफा ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी बन गयी। यहीं कमाई ही भविष्य की सियासी सडक़ पर मिशन २०१४ की सफलता के सीढ़ी कहां-कहां बनेगी, इसका अंदाजा नहीं भविष्य में देखा जा सकता है।
प्रदेश सरकार की ओर से उत्तरशती रजत जयंती समारोह को जो भव्यता प्रदान की गयी, ऐसा किसी राजनीतिक दल ने शायद ही सोचा हो। मुख्यमंत्री की कुर्सी पर भले ही अखिलेश यादव बैठे हो लेकिन यह सोच राजनीतिक पुरोद्घा मुलायम सिंह यादव की। आजादी के बाद उत्तर प्रदेश की पहली विधानसभा के कितने सदस्य हमारे बीच मौजूद हैं, यह बात बताने के लिए वर्तमान जनप्रतिनिधियों को भी अपने जेहन पर काफी जोर डालना पड़ता। उत्तर प्रदेश के चार बार मुख्यमंत्री रहने के साथ उत्तराखंड की भी रहनुमाई कर चुके नारायण दत्त तिवारी के साथ राजाराम किसान और कमाल अहमद रिजवी तीन लोगों को जो सम्मान इस समारोह में दिया गया, उसका संदेश बहुत दूर तलक जाएगा। आंध्र प्रदेश के राज्यपाल पद से हटने के बाद सियासी सियापे में चले गए नाराणण दत्त तिवारी को सडक़ से लेकर सदन तक इस समारोह में दिल से जो सम्मान मुलायम के साथ अखिलेश सरकार ने दिया, उसको किसी पैमाने पर नहीं नापा जा सकता है। एनडी तिवारी से राजनीति और विकास का मंत्र सीखने की बात कहकर मुलायम ने जो संदेश दिया, उसको सियासी स्लेट से मिटाना आसान नहीं होगा।
उत्तर प्रदेश के एक हजार से ज्यादा पूर्व विधायकों को नए साल में इस समारोह में बुलाकर जो सम्मान देने के साथ उनकी इच्छा के अनुरूप मुख्यमंत्री ने पेंशन बढ़ाने, परिवारीजनों को भी पेंशन के दायरे में लाने और कूपन की राशि बढ़ाने के भी आश्वासन दिए। कहने को इस सबका श्रेय मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को जाता है, लेकिन समारोह में इसके लिए सबसे ज्यादा धन्यवाद मुलायम को दिया गया। यह धन्यवाद उन सियासी खिलाडिय़ों का था जो आज की तारीख में अपने क्षेत्र में कम दखल नहीं रखते हैं। उनके दिल से निकले शुक्रिया के दो बोल मिशन-२०१४ की मंजिल के सफर में सुहाने ही लगेंगे। भविव्य की ओर देखने वाले मुलायम सिंह यादव ने समारोह के दौरान अपनी संवेदनशीलता दिखाते हुए सर्दी व भूख से मौतों को शर्मनाक बताते हुए खुशहाली और बराबरी के लिए संघर्ष करने का जो संदेश दिया, उससे जनता के दिल में उनकी जगह और मजबूत ही हुई। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को समारोह के समापन मे बुलाने से इसके गौरव में चार चांद लग गए। इसकी एक और खास बात रही कि  मुलायम ने जहां वाहवाही लूटी          वहीं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की शालीनता, विपक्ष से संवाद बनाए रखाने की योग्यता तथा उनकी संवेदनशीलता की भूरि-भूरि प्रशंसा करने में कोई नहीं थका। बिना किसी रागद्वेष के राजनीति के मानवीय मूल्यों को सुरक्षित रखने के लिए संघर्ष करने में मुलायम सिंह यादव की प्रशंसा करने वालों की कतार और लंबी हो गई।

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