रोमिंग जर्नलिस्ट

शुक्रवार, 30 नवंबर 2012

सिंगल स्क्रीन सिनेमा को सीएम ही देंगे संजीवनी



- सिंगल स्क्रीन सिनेमा को जिंदा रखने की मुलायम की सोच का मायावती ने गला घोंटा
- बंद सिनेमाघरों को जिंदा करने की मुलायम नीति को अखिलेश से लागू करने की मांग
- उत्तर प्रदेश सिनेमा एग्जीबिटर्स फेडरेशन ने मुख्यमंत्री को खत भेजकर किया गुजारिश
दिनेश चंद्र मिश्र
लखनऊ। मल्टीप्लेक्स की चकाचौंध ने दशर्कों को एक नया एहसास दिया है लेकिन इसकी चकाचौंध में प्रदेश के पचास प्रतिशत से ज्यादा सिनेमाहल बंद हो चुके हैं तो वहीं गरीबों को सस्ता और सुलभ मनोरंजन उपलब्ध कराने का प्रदेश सरकार का संकल्प भी बेमानी लगने लगा है। सैकड़ों की तादाद में बंद हो गए सिंगल स्क्रीन सिनेमा को नई जिंदगी के लिए सांस कोई दे सकता है तो वह है प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव। कारण प्रदेश की पिछली सरकार की मंशा गरीबों के मनोरंजन के साधन कहे जाने वाले सिंगल सिनेमा स्क्रीन को जिंदा करने की होती तो मुलायम सिंह यादव जब मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने इसके लिए पांच साल की जो प्रोत्साहन नीति बनायी थी, सन्ï २०१० में खत्म होने के बाद छूट की तिथि आगे बढ़ाने की काम करती। मुलायम की सिंगल स्क्रीन सिनेमा को जिंदा रखने की दम तोड़ चुकी सोच को अब नई जिंदगी के लिए संजीवनी कब मुख्यमंत्री देंगे? उम्मीद भरी नजरों से सैकड़ों सिनेमामालिकों के हाथ हजारों सिने कर्मचारी इसकी प्रतीक्षा कर रहे हैं।
प्रदेश में अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा मनोरंजन कर, पायरेसी,केबिल टीवी के चलते सालों से दम तोड़ रहे सिंगल स्क्रीम सिनेमाहालों की संख्या ५३४ हो गयी है। प्रदेश में जब मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे तो सन २००४-२००५ में सिंगल स्क्रीन सिनेमाहालों को प्रोत्साहित करने को नई नीति लागू की गई थी। इस नीति के तहत सिनेमाहाल को पूरा तोडऩे व 300 सीटों का बनाने पर ही व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति देने जैसी शर्ते थी। मुलायम की इस नीति के प्रति प्रदेश के कई जिलों में सिनेमा मालिक आकर्षित हुए। मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में सिंगल स्क्रीन सिनेमा को जिंदा करने के लिए इस संबंध में शासनादेश संख्या-१५६०/११ क-नि-६-२००५-बीस.एम.(१०६)/२००५ दिनांक-२७-०९-२००५ को जारी किया गया था। मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में जारी इस नीति के पीछे सिनेमाहाल के व्यवसाय को पुर्नजीवित कराने की मंशा थी। इस नीति के तहत प्रथम तीन वर्षों के लिए मनोरंजनकर में १०० प्रतिशत की छूट व चौथे व पांचवे वर्ष में ७५ प्रतिशत की छूट दी गयी थी। मुलायम राज के इस शासनादेश की अवधि मायावती राज में सन्ï २०१० में खत्म हो गया। इसकी समय सीमा बढ़ाने के लिए  उत्तर प्रदेश सिनेमा एग्जीबिटर्स फेडरेशन के कई पदाधिकारी तत्कालीन मुख्यमंत्री व मनोरंजन कर आयुक्त से मिलकर गुहार लगाए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मायावती राज में सिंगल स्क्रीन सिनेमा को जिंदा रखने की बनी नीति के शासनादेश की अवधि तो नहीं बढ़ायी गयी लेकिन मल्टीप्लेक्स को छूट प्रदान करने के लिए एक नया शासनादेश जरूर जारी कर दिया गया। मायावती के इस फैसले से मल्टीप्लेक्स तो चांदी कांट रहे हैं लेकिन सिंगल स्क्रीन सिनेमा दिनोंदिन दम तोड़ रहे हैं। खण्डहरों की शक्ल में तब्दील हो रहे सिंगल स्क्रीन सिनेमा को जिंदा करने की नीति को मायावती राज में सन्ï २०१० में गला घोंटने के बाद से आज तक ही ६५ सिनेमाघर प्रदेश में बंद हो चुके हैं। मायावती सरकार की सिंगल स्क्रीन सिनेमा को जिंदा करने के प्रति बरती गयी उदासीनता के चलते मुलायम राज में राजधानी के आलमबाग में स्थित कृष्णा सिनेमा की जगह बन रहे मिनीप्लेक्स का निर्माण अधर में लटका है, वहीं कैसरबाग स्थित आनंद सिनेमा के शुरू होने पर शासनादेश का ताला लटका है। उत्तर प्रदेश सिनेमा एग्जीबिटर्स फेडरेशन ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को खत भेजकर मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में सिंगल स्क्रीन सिनेमा को लेकर जारी नीति संबंधित शासनादेश संख्या-१५६०/११ क-नि-६-२००५-बीस.एम.(१०६)/२००५ दिनांक-२७-०९-२००५ को पुन: जारी करने की मांग की है। उम्मीद है ‘मनोरंजन के मंदिरों’ का कब्रिस्तान बन गये उत्तरप्रदेश में मुख्यमंत्री के फैसले से गीत-संगीत की झंकार खण्डहर बने सिनेमाहालों में फिर सुनाई देगी।

कोई टिप्पणी नहीं:

इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.