रोमिंग जर्नलिस्ट

बुधवार, 16 मई 2012

नेत्रहीनों के लिए धृतराष्ट्र सत्ता!




दिनेशचंद्र मिश्र
लखनऊ। पंजाब नेशनल बैंक की हलवासिया शाखा में काम करने वाले एसके सिंह की आंखें दुनिया की रंगीनी नहीं देख सकतीं, लेकिन वे यह महसूस जरूर कर रहे हैं कि भारत सरकार देश के अर्थ को लेकर अंधी तो है ही, अंधों को लेकर भी अंधी है। रिजर्व बैंक की ओर से जारी किए गए एक, दो व पांच रुपए के नए सिक्के नेत्रहीनों के लिए मुसीबत बन गए हैं। इससे सरकार की नेत्रहीनों प्रति संवेदनशीलता का भी पता चलता है। श्री सिंह का कहना है कि पचास पैसे व एक रुपए के नए सिक्के एक ही आकार के हैं। वहीं पांच रुपए का नया छोटा सिक्का भी एक रुपए के नए सिक्के के समान ही है। नेत्रहीन सिक्कों को टटोलकर ही पहचानते हैं। नए सिक्के में नेत्रहीनों के लिए कोई पहचान का निशान न होने के कारण काफी दिक्कतें हो रही हैं। कई बार एक के धोखे में पांच का सिक्का चला जाता है। यह दर्द सिर्फ नेत्रहीन एसके सिंह का ही नहीं बल्कि उनके जैसे हिन्दुस्तान के एक करोड़ से ज्यादा लोगों का है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में एक करोड़ 25 लाख लोग दोनों आंखों से और करीब 80 लाख लोग एक आंख से देखने में अक्षम हैं। यह संख्या पूरे विश्व के नेत्रहीनों की एक चौथाई है।
भारत में नेत्रहीनों की इतनी संख्या होने के बाद भी केंद्र सरकार द्वारा रुपए के नए लोगो को जारी करने के बाद जो नए सिक्के जारी किए गए हैं, उसको लेकर अपने ही निर्देश को ताक पर रख दिया गया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को भारत सरकार ने सिक्कों में एक विशेष पहचान कट और नोट में खास पहचान बनाने का निर्देश है, ताकि इनको नेत्रहीन आसानी से टटोलकर पहचान कर लें। आरबीआई द्वारा जारी नए सिक्कों में इसका ध्यान न रखने के कारण नेत्रहीनों के साथ बुजुर्ग भी भ्रम के शिकार हो जाते हैं। 
बीए करने के बाद स्पेशल बीएड कर रहे अनिल कुमार वर्मा की आंखों में भी रौशनी नहीं है। नए सिक्के को लेकर अक्सर यह भी भ्रमित हो जाते हैं। पुराना जो सिक्का होता था, उसमें नेत्रहीनों के लिए कट होता था, लेकिन नए सिक्के जो जारी किए गए हैं, उसमें मानक का ध्यान न रखने से नेत्रहीनों को सबसे ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। अनिल का कहना है एक रुपए, पांच रुपए का नया सिक्का व पचास पैसे का पुराना सिक्का एक ही तरह का है। इस कारण हम लोगों को काफी परेशानियां आ रही है। लखनऊ आए ललितपुर कलक्ट्रेट में तैनात नेत्रहीन संतबली चौधरी से जब नए सिक्कों को लेकर बात हुई तो वह भी अपनी पीड़ा छिपा नहीं सके। उनका कहना है पांच रुपए का नया सिक्का और पचास पैसे व एक रुपए का सिक्का लगभग एक ही आकार और वजन का है। इन सिक्कों में किसी कट का निशान न होने के कारण रोजाना दिक्कतों से दो-चार होना पड़ता है। 
नेत्रहीन क्षत्रपाल शर्मा भी नए सिक्कों को पहचानने में होने वाली परेशानी से दुखी है। उनका कहना है लगता है सरकार को अब पैसे से मतलब है, संवेदनशीलता उसके अंदर खत्म हो गई है। एक करोड़ से ज्यादा नेत्रहीन किस तरह नए सिक्कों को पहचानेंगे? इसके बारे में सरकार ने सोचा ही नहीं है। आरबीआई द्वारा जारी नए सिक्कों को जारी करने से पहले नेत्रहीनों के बारे में न ध्यान देने को लेकर राष्ट्रीय दृष्टिबाधित संस्था इस मुद्ïदे को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की रणनीति बना रही है। संघ के अध्यक्ष जेपी कांडवाल का कहना है कि वित्त मंत्री के साथ प्रधानमंत्री को इस बारे में खत भेजा जाएगा। खत पर ध्यान नहीं जाएगा तो नेत्रहीन सरकार की आंखें खोलने के आंदोलन की अगली रणनीति बनाएंगे। 

4 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

A good post..Keep it up...

-Arvind K.Pandey

http://indowaves.wordpress.com/

राम लाल ने कहा…

केंद्र में एक पेट्रोलि‍यम मंत्री हैं श्री जयपाल रेड्डी. दुर्भाग्‍य से उन्‍हें बैसाखि‍यों के सहारे चलना पड़ता है. पेट्रोलि‍यम मंत्रालय से पहले उनके पास सार्वजनि‍क नि‍र्माण वि‍भाग था. दि‍ल्‍ली का वह वि‍ज्ञान भवन उनके अघीन आता था जहां आए दि‍न केंद्र सरकार के सभी महत्‍वपूर्ण आयोजन होते हैं, जब भी वे कि‍सी भी कार्यक्रम के लि‍ए वहां जाते थे, उनके सुरक्षाकर्मी उन्‍हें कुर्सी पर उठा कर ऊपर चढ़ाते थे. वि‍ज्ञान भवन में आज भी वि‍कलांग लोगों के लि‍ए अंदर जाने के लि‍ए रैम्‍प का प्रावधान नहीं है.

अगर वि‍त्‍तमंत्री/रि‍ज़र्व बैंक का गवर्नर दृष्‍टि‍बाधि‍त हो तो भी इस देश में सि‍क्‍कों का स्‍वरूप नहीं बदलने वाला. ये सब जूते के पीर हैं, उच्‍चतम न्‍चायालय जब इनके पि‍छवाड़े चार जड़ेगा तभी उठकर बैठेंगे ये कामचोर...

बेनामी ने कहा…

खरगोश का संगीत राग रागेश्री पर आधारित है जो कि खमाज थाट का सांध्यकालीन
राग है, स्वरों में कोमल निशाद और
बाकी स्वर शुद्ध लगते हैं,
पंचम इसमें वर्जित है, पर हमने इसमें अंत में पंचम का प्रयोग भी किया है,
जिससे इसमें राग बागेश्री भी झलकता
है...

हमारी फिल्म का संगीत
वेद नायेर ने दिया है.
.. वेद जी को अपने संगीत कि प्रेरणा जंगल में चिड़ियों कि चहचाहट से मिलती है.
..
Look into my web site : संगीत

बेनामी ने कहा…

good story sir

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