रोमिंग जर्नलिस्ट

गुरुवार, 1 सितंबर 2011

करप्शन में भी स्वर्ग है कश्मीर


‘धरती में अगर कहीं स्वर्ग है तो कश्मीर में है’ बचपन में स्कूल में मिली इस जानकारी में कश्मीर पहुंचने के बाद और इजाफा हो गया। यद्यपि यह इजाफा उस स्वर्ग से कोई ताल्लुक नहीं रखता था, जिसकी दुनिया मुरीद है। जिंदगी के खौफ और पैसे के लालच में मीडिया को अलगाववादी संगठनों के इशारे पर नाचते देखने की आदत और अपरोक्ष रुप से उसका हिस्सा बनना नियति बन गई थी। लालू राज में साथियों द्वारा बिहार को भ्रष्टï राज्य कहने की बात न चाहते हुए भी इत्तेफाक करना पड़ता था। पर कश्मीर में करप्शन का जो हाल देखा, उसे देखकर सोच ही बदल गयी। केंद्र सरकार द्वारा कश्मीर में विकास और विस्थापितों के पुर्नवास के नाम पर दिए जाने अरबों रुपए भ्रष्टïाचार की कोख में कैसे चले जाते हैं? इसका नमूना किसी भी महकमे में विकासकार्यों का भौतिक सत्यापन करके जाना जा सकता है। जम्मू में तैनात सीबीआई के एसपी गौड़ साहब से मिले इस तथ्य की पड़ताल करने के लिए इंटरनेट को हथियार बनाया। जम्मू-कश्मीर सरकार की वेबसाइट से कुछ विभागों का डाटा एकत्र करने के बाद मौके पर जाकर देखने का फैसला किया। श्रीनगर में अमर उजाला के ब्यूरोचीफ के साथ जिन जगहों को पहले चिन्हित किया था तो वहां जाने पर पता चला कि कोई काम हुआ ही नहीं लेकिन भुगतान हो चुका है। भ्रष्टïाचार का आलम यह था बारामूला से शेखपुरा तक शेखपुरा से बारामूला तक एक ही रोड मरम्मत को दोनों तरफ से पैसा पास हुआ कि लेकिन काम नहीं हुआ। काम के नाम पर नतीजा सिफर। ऐसे ढेरों नमूने के देखने के बाद ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट हाथ लगी, जिसमे करप्शन के मामले में देश में सबसे आगे जम्मू-कश्मीर का जिक्र था। भ्रष्टïाचार तो भारत की नस-नस में व्याप्त है लेकिन कश्मीर में जिस तरह भ्रष्टïाचार महामारी के रूप में फैला है उसको नजदीक से जाकर ही अनुभव किया जा सकता है। सेना को अगर हटा दिया जाए तो जम्मू-कश्मीर का भ्रष्टï तंत्र कब कश्मीर को पाकिस्तान के हवाले कर देगा, कहां नहीं जा सकता है। कश्मीर में भ्रष्टïाचार सरकारी कामकाज से लेकर आम आदमी की जिंदगी में रोजमर्रा का हिस्सा बन गया है।  
कश्मीर में भ्रष्टïाचार सबसे ज्यादा होने के बावजूद इसके खिलाफ आवाज उठाने वाला कोई भी दिखाई नहीं पड़ता। उत्तर भारत में ट्रैफिक सिपाही द्वारा दस-बीस रुपए वसूलने पर ब्रेकिंग न्यूज टाइप की खबर अक्सर छपती है, वहीं जम्मू-कश्मीर में मीडिया की सारी हेकड़ी विलुप्त हो जाती है। यह बात समझ से परे थी। भ्रष्टïाचार के ऐसे कई मामलों की पड़ताल करने पर पता चला कि  करप्शन में लिप्त अधिकांश लोग अलगाववादी संगठनों से किसी न किसी रूप से जुड़े हुए हैं। केंद्र सरकार के पैसे को हजम करके भारत के खिलाफ ही उपद्रव करने का जो खुला खेल कश्मीर में सियासत के साये में पल बढ़ रहा था, उसे देखकर बहुत कोफ्त हुई। भ्रष्टïाचार के ऐसे कई खेलों को उजागर करने के लिए एक न्यूज स्टोरी बनायी। करप्शन करने वालों के लिए कश्मीर किस तरह स्वर्ग बना हुआ है। भ्रष्टïाचार के चंद नमूनों के साथ खबर को तैयार करके उसमे उन अलगाववादी नेताओं का भी जिक्र किया, जिनके गुर्गे इस काम में लिप्त थे। संपादक प्रमोद भारद्वाज को खबर दी तो उन्होंने तारीफ करते हुए कहा कि नोएडा खबर भेजनी होगी। नोएडा में शशि शेखर के ध्यानार्थ खबर भेजने की बात सुनने के बाद यह बात दिमाग में आयी कि यह खबर भी बिना छपे ही दफन हो जाएगी। खैर खबर जाने के दो घंटे बाद ही आशंका सच साबित हुई। शशि शेखर का संदेश मिला कि दिनेश से बोल दो ज्यादा क्रांतिकारी ना बने। मेहनत करके कोई खबर बनने के बाद जब उसके साथ ऐसा सलूक होता है तो दर्द वैसा ही होता है जैसे किसी बच्चे की अजन्मी मृत्यु हो गयी है। ‘खबर’ की ऐसी-तैसी करने के बाद आफिस में रुटीन काम निपटाने में जुट गया। खबर न छपने की बात साथियों को पता चली तो वे सांत्वना व्यक्त करने आ गए बोले भाई साहब यहां चाहकर भी कुछ अलग हटकर नहीं किया जा सकता है। जान का खतरा है सो अलग। उनकी बातों को सिर हिलाते हुए सुनता रहा। मूड पूरी तरफ आफ था। दिमाग में गुस्सा और क्या करें, क्या ना करे? के नकारात्मक ख्याल आ रहे थे। दिमाग को संतुलित करने के लिए तवी मइया के चरणों में जाने को अग्रसर हुआ। रात के आठ बज रहे थे, पैदल तवी के किनारे जाना मुनासिब नहीं था, लिहाजा तवी के पुल के ऊपर सोच-विचार के आलोडऩ-बिलोडऩ के साथ टहलने लगा। जम्मू-कश्मीर आने के बाद घर की चिंता, पिता जी की नौकरी छोडऩे की सीख के साथ घड़ी पर नजर डाली तो नौ बजने वाले थे। दिसंबर का आखिरी सप्ताह होने के कारण ठंड का असर बढऩे लगा था। तवी नदी के पुल पर वाहनों की संख्या कम हो चली थी। केवल सेना के वाहनों की ही आवाजाही चल रही थी। मैँ आफिस की और लौट पड़ा।
सिटी एडीशन छूटने के साथ जब आफिस से निकला तो रात के एक बज चुका था। मैं अनिमेष और योगेंद्र रोजाना की तरह पैदल घर की तरफ चल पड़े। पुलिस लाइन गेट पर लगी घड़ी तापमान पर नजर पड़ी तो माइनस चार डिग्री सेल्सियश दिखा रही थी। जिससे ठंड का अहसास बढ़ गया। सेना के बैरियर और चेकपोस्ट पार करते हुए घर पहुंचने के बाद रजाई में पर खबर न छपने का दर्द और भी तीव्रता के साथ दिल-दिमाग पर छाने लगा। माता रानी से प्रार्थना की  अब अपना आर्शीवाद दे दो मां। प्रार्थना में व्यवधान उस समय पड़ा जब मोबाइल में एसएमएस टोन बजी। देखा तो बनारस के एक मित्र का नए साल का अग्रिम बधाई संदेश था। जवाब देने का मूड नहीं हुआ। मोबाइल साइलेंट मोड में डालने के बाद सोने की कोशिश में लग गया। न जाने कब नींद आ गयी। सबेरे आंख खुली तो गुलाबी धूप छत पर पसरी हुई थी। फ्रेश होने के बाद आज क्या किया जाए? इसी सोच-विचार में तैयार होकर आफिस से निकल पड़ा। आफिस में मीटिंग के दौरान प्लानिंग पर चर्चा के बाद जम्मू-कश्मीर में हर महीने लोग बातचीत में मोबाइल पर कितना खर्च करते हैें? यह जानने के लिए मोबाइल कंपनियों के दफ्तर का चक्कर काटने निकल पड़ा। मोबाइल कंपनियों के दफ्तर में जाने पर खबर की खोजबीन में एक ऐसी खबर हाथ लग गयी जो राष्टï्र हित में उजागर करना अत्यंत आवश्यक था....

क्रमश:

4 टिप्‍पणियां:

KB ने कहा…

Dinesh, what ever u have seen, investigated is nothing new, everyone, every journalist working there knows these facts. Be it Sashi Shehkar or some other RE, no one is interested in publishing anti J&K news story. |I don't know whats their interests but yeah! all n everyone's interests r interlinked. No one is interested in reading anything except militancy or soft stories about the state thats what has been circulated. ITs all money game from state via center to WB, UNESCO n other international funding bodies. If people got interested in something other than militancy n its politics then what will happen to the so called issues like militancy its the only lifeline of J&K politics. Then accountability will also arise n thus curtain on all luxuries of all politicians, bureaucrates, officials, everyone from top to bottom. Next time either write for ur blog or don't waste time, otherwise may be u will disappear on the name of militancy!

Dr. Rajkumar ने कहा…

YesterdayRajkumar Prince
Respected Sir namskar,
mai Dr. Rajkumar (Prince) from meerut. Mai pichale saat saal se N.A.S. College me padhata aa raha hun. Aur is dauran maine college men shahid mangal paandy ji ki uttar pradesh ki sabse badi murti banaayi hai. lekin yahan college waale mujhe har saal college se nikaal dete hn. qunki main temporary teacher hun aur s.c. jaati ka ladka hun. murti ki keemat lagbhag 40-50- laakh h. jabki mujhe ek rupya bhi nahi diya. meri jaan ko khatra h. N.A.S. college k log muje marna chahte hn.plz. help me
with regards
Dr. Rajkumar (prince)
09319612235
meerut.

Dr. Rajkumar ने कहा…

YesterdayRajkumar Prince
Respected Sir namskar,
mai Dr. Rajkumar (Prince) from meerut. Mai pichale saat saal se N.A.S. College me padhata aa raha hun. Aur is dauran maine college men shahid mangal paandy ji ki uttar pradesh ki sabse badi murti banaayi hai. lekin yahan college waale mujhe har saal college se nikaal dete hn. qunki main temporary teacher hun aur s.c. jaati ka ladka hun. murti ki keemat lagbhag 40-50- laakh h. jabki mujhe ek rupya bhi nahi diya. meri jaan ko khatra h. N.A.S. college k log muje marna chahte hn.plz. help me
with regards
Dr. Rajkumar (prince)
09319612235
meerut.

Binay ने कहा…

Interesting but sad

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