रोमिंग जर्नलिस्ट

सोमवार, 18 जुलाई 2011

दीपावली की एक रात मां के साथ

होली हो या दीपावली त्योहार का आनंद परिवार के बीच में जो होता है, वह शायह ही कहीं और हो। जेहन में बस्ती से लेकर बनारस तक ऐसे त्योहारों की यादें तब बादलों की तरह घुमडऩे लगी जब दीवाली की तारीख नजदीक आने लगी। दीवाली आने के साथ अमर उजाला दफ्तर के कई साथी जो महीनों से घर नहीं गए थे, वह घर जाने की तैयारी में मशगूल हो गए। उनकी तैयारी देखकर घर की याद सताने लगी। पुष्कर पाण्डेय पहले ही मन न लगने के कारण बोरिया-बिस्तर छोडक़र अलीगढ़ जा चुके थे। अनिमेष कई महीने से घर नहीं गया था, वह घर जाने की तैयारी में जुट गया। आफिस से आधा दर्जन लोग छुट्ïटी पर जाने की तैयारियों के साथ टे्रन टिकट कन्फर्म कराने में लगे हुए थे। एक तरफ दोस्तों की तैयारी दूसरी तरह हम और योगेंद्र क्या करेंगे, यह सवाल दिमाग में उलझन बन गया था। दोस्तों को रेलवे स्टेशन पर हैप्पी दीपावली बोलकर विदा करने के बाद हम लोगों ने प्लान बनाया कि दीपावली की रात मां के चरणों में दीप जलाकर मनाएंगे। धनतेरस को जम्मू के रघुनाथ मार्केट में घंटों घूमने के बाद पिता जी को फोन किया तो वह बोले इतनी दूर तुम चले गए हो, त्योहार का क्या मतलब। तुम जम्मू में हो, परिवार बनारस में, मैं बस्ती में हूं। ऐसे में किसका त्योहार, कैसा त्योहार? पिता जी की बातों को सुनकर मैने कहा कि माता रानी के चरणों में दीप जलाने का सुअवसर मिला है। पिता जीे को बताया कि माता रानी के चरणों में ही दीपावली मनाऊंगा। पत्नी और बच्चों के साथ वैष्णो देवी के दर्शन करने पहले भी जा चुका था, लेकिन जम्मू में आने के बाद यह पहला मौका था जब मां के दर्शन करने की योजना बनायी। छोटी दीपावली की रात अखबार का काम खत्म होने के बाद मैं और योगेंद्र घर जाने की बजाए सीधे बस स्टैंड पहुंच गए। बस स्टैंड पर ही राजमा चावल खाने के बाद भोर में चार बजे कटरा को जाने वाली पहली बस में ही जाकर सोने का फैसला किया। लेदर जैकेट के साथ मफलर को भी गले में लपेटने के बाद बस में आगे की सीट पर पीठ सीधी करने के लिए लेट गए। सर्द मौसम में बस की खिडक़ी बंद होने के बावजूद भी सर्द हवाएं पता नहीं किस-किस कोने से घुसकर हड्ïिडयों को कंपाने का काम कर रही थी। देह को सर्द हवाओं से बचाने के लिए हम दोनों गठरी की शक्ल में एक सीट के ऊपर लेटे पड़े थे। कभी इस करवट तो कभी इस करवट होकर ठंड से बचने की मसक्कत चलती रही। चार बजने के साथ बस क्लीनर आकर बोला साहब जग जाइए, हाथ मुंह धो लीजिए, बस चलने वाली है। दो घंटे की नींद के बाद चाय की चुस्की लेने के साथ फ्रेश होने के बाद बाद हम लोग बस में बैठ गए। उद्यमपुर का रहने वाला बस क्लीनर करीम कटरा..कटरा की रट लगाने लगा। आधे घंटे के अंदर बस भर गई। देश के कोने-कोने से आए माता रानी के भक्तों को लेकर बस कटरा चलने को तैयार थी। ड्राइवर ने बस स्टार्ट कर दिया, करीम बस के ऊपर सामान बांधने में जुटा था। सामान बांधने के बाद नीचे उतरने पर बस के अंदर घुसते ही ड्राइवर को सलाम ठोका। बस का सफर प्रारंभ होते हीे से करीम ने यात्रियों की ओर मुखातिब होकर कहा बोलो शेरावाली मां की जय। करीम का यह अंदाज बहुत पसंद आया। करीम के श्रीगणेश के बाद रास्ते भर यात्रियों के अंदर माता के जयकारे की एनर्जी कटरा नजदीक आने के साथ बढ़ती जा रही थी। जयकारे की गूंज के साथ बारह बजे से पहले ही कटरा बस स्टैंड पहुंच गए। कटरा पहुंचने के बाद हम लोग मां के दरबार में मत्था टेकने के लिए परची कटाने की कतार में लग गए। योगेंद्र ने कहा भाई साहब हम लाइन में लगते हैं, आप तब तक फ्रेश हो लीजिए। एक घंटे लाइन में लगने के बाद योगेंद्र परची लेकर आ गया। माता रानी का नाम लेकर हम दोनों चढ़ाई प्रारंभ की। घर से हजारों किमी से दूर दीपावली के दिन हम दोनों माता रानी का नाम लेते हुए बाणगंगा एक घंटे के भीतर ही पहुंच गए। बाणगंगा में सामान की चेकिंग के नाम पर एक बैग भर था योगेंद्र का, उसमे मेरा भी जैकेट था। चेकिंग के बाद भवन के लिए चढ़ाई प्रारंभ हुई। रास्ते में हजारों यात्रियों का जत्था भी मां के जयकारे के साथ बढ़ रहा था। बड़ों के हाथ में दीप थे तो बच्चे के हाथ में फुलझडिय़ां थी। छोटे-छोटे बच्चों का जोश और खरोश देखने लायक था। सामान लादकर योगेंद्र आगे बढ़ रहा था, मैं उसके साथ खाली हाथ था। रास्ते में छोटी-छोटी लड़कियोंं को दुर्गा जी के प्रतीक रूप में बिठाकर पैसा मांगते लोगों की कतार मुझे कचोटने लगी। योगेंद्र भी छोटी-छोटी लड़कियों को दुर्गा जी की शक्ल में पैसा बटोरने की हरकत देखकर हतप्रभ था। जम्मू-कश्मीर में गरीबी की कोख में पल रहे परिवारों की दशा देखकर जहां कोफ्त हो रही थी, वहीं इन बच्चियों को स्कूल जाने की बजाए रास्ते में भीख मांगने के लिए बैठाए रखना भी खल रहा था। ऐसे कई मंजरों को देखने के साथ चढ़ाई चल रही थी। रास्ते में गर्मी के कारण शरीर पर कपड़े कम होते जा रहे थे। जींस और टी-शर्ट में भी पसीने से तरबतर हो गया था। चाय-काफी के लिए रास्ते में रुकने पर घर-परिवार के साथ दोस्तों की दीवाली से जुड़ी यादें जेहन में आ रही थी। रास्ते में एक जगह थकान मिटाने के लिए योगेंद्र के साथ काफी की चुस्की ली और घर फोन मिलाया। क्लास दो में पढऩे वाली छोटी बेटी ने फोन उठाया। फोन उठाते ही उसने कहा पापा आप नहीं आ रहें हैं क्या? मैने जवाब दिया बेटी माता रानी के दरबार में जा रहा हूं दीप जलाने। माता रानी से तुम्हारी पढ़ाई के लिए मन्नत मांगूगा। उसने तुरंत पापा आप पटाखे भी मांग लीजिएगा। दीपावली में पटाखे फोडऩे में बहुत मजा आता है। बेटी से लेकर बीबी तक बातचीत करने के बाद नौकरी की मजबूरियां खलने लगी। दिल में अंदर ही अंदर मां से मांगने लगा। मां इस दुनिया में साथ छोडक़र चली गयी दिल ने कहा कि मां अब तुम ही हमारी मां हो। अपना आर्शीवाद व स्नेह सदैव बनाए रखना। बनारस में इलाज के अभाव में मां की मौत के बाद मां की कमी को महसूस करते हुए  माता रानी को दिल से आवाज देते हीे में आंखों में पानी आ गया। दर्जनों बार लाशों के बीच खबर तलाशने का धंधा होने के बावजूद भी आंखों में कभी पानी नहीं आया, लेकिन अपने दुख के चलते भरी आंखों को पोछते हुए कहा कि मां इन आंसुओं को आप ही पोछेंगी। योगेंद्र मेरी आंखें गीली देखकर बोला भाई साहब कहीं लंबे सोच में डूब गए हैं आप। मैने कहा भाई बाल-बच्चों वाला आदमी हूं, त्योहार का दिन है इसलिए घर से दूरी खल रही है। खैर हाथ-मुंह धोकर हम दोनो फिर माता रानी का दर्शन करने के लिए चढ़ाई प्रारंभ की। शाम तक भवन पहुंचने के बाद ठंडे-ठंडे पानी में स्नान करके दर्शन की कतार में हम लोग गए। माता रानी का भव्य दर्शन करने के बाद भवन में दीप जलाने के उपरांत अजीब सी शांति और सुकून की अनुभूति हुई। दर्शन के बाद नीचे उतरने लगे। माता रानी के भवन से यार-दोस्तों को फोन करने के बाद चल दिया जम्मू के लिए। मां के चरणों में अमावस की इस रात में आलौकिक सुख-शांति की प्राप्ति हुई। और सोचा अगली किसी दीपावली में पूरे परिवार के साथ फिर आऊंगा दीप जलाने।
क्रमश:

1 टिप्पणी:

PRITI ने कहा…

‎"moti rakhe yaadon ki kandeelon me ,palken jagmag rakkhi is diwaali par ,aur nahi to man halka ho jata hai ,hans padata hun mai apni badhaali par, tera chehara qaid rahega aankhon me ,aansu rakhunga pyare rakhwaali par " aisi hi kuchh aapki peeda lagti hai ghar se door rahne ki .bahut bhavpravanata hai aapke lekhan me !!

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