रोमिंग जर्नलिस्ट

बुधवार, 22 जून 2011

सर्द सरहद पर सदमे के बीच सनसनी

 

सन् 2007 का दिसंबर का महीना था। सर्दी से आदमी हो या जानवर सब परेशान थे। सडक़ों पर आवाजाही कम थी तो सरकारी दफ्तरों में भीड़ नहीं के बराबर थी। जम्मू में पचास दिन से ऊपर हो चुके थे। घर-परिवार के साथ दोस्तों की याद भी सता रही थी। बनारसी ठंडई का भी मोह जाग गया था। तारीख 27 दिसंबर थी, सर्दी के कारण कुछ देर घूमने-फिरने के बाद आफिस में आकर नेट पर कुछ जानकारी बटोरने में जुटा था। कब शाम हो गई पता ही नहीं चला। संपादक  प्रमोद भारद्वाज ने आफिस आने के बाद कमरे में लगे टीवी पर न्यूज चैनल को स्टार्ट कर दिए थे। अचानक वह अपने कमरे से माइ गाड कहते हुए निकले। आफिस में बैठे लोग उनसे कुछ पूछते इससे पहले बेनजीर भुटटो की आत्मघाती हमले में मौत की खबर देते हुए पूरी रियासत के सभी रिपोर्टरों को एलर्ट जारी करने के लिए कहा। बेनजीर भुटटों की मौत की खबर तब तक नोएडा में बैठे समूह संपादक शशि शेखर के संज्ञान में आ गयी थी। उन्होंने फोन करके प्रमोद जी को इसको लेकर एलर्ट करने के साथ कुछ आइडिया भी दिए। सर्द मौसम में आफिस के भीतर सदमे भरी सनसनी फैल गयी थी। बेनजीर भुट्टïों की मौत को लेकर राजनैतिक दल, महिला संगठनों की प्रतिक्रिया के साथ महिला राजनीतिज्ञों से भी बातचीत के साथ और क्या-क्या किया जाए, यह सवाल खड़ा होने पर पाकिस्तान से भारत में शादी के बाद आई लड़कियों से बातचीत करने का सुझाव दिया। संपादक जी ने इसके लिए सभी जिला मुख्यालयों पर तैनात रिपोर्टरों से ऐसी लड़कियों से बातचीत करके खबर भेजने के लिए फोन करने को कहा। किसी का फोन स्विच आफ मिला तो कोई रात के नाम पर कन्नी काटने में लग गया। सूर्य अस्त होने के बाद अपने काम-धंधे में मस्त हो जाने वाले रियासत के अधिकांश रिपोर्टरों की इस आदत से मैं पहले ही वाकिफ हो चुका था। बेनजीर की मौत के बाद देश-दुनिया में हो रही प्रतिक्रिया के साथ जम्मू-कश्मीर में हाई एलर्ट के साथ कुछ लीक से हटकर खबरों को लेकर  माथापच्ची के साथ एक घंटे की फोन पर हुई मशक्कत का परिणाम शून्य देखकर निराशा हुई। संपादक जी भी अपनी कोफ्त छिपा नहीं पा रहे थे। यूपी-बिहार में खबरों को लेकर रिपोर्टरों के जूझने की ताकत से वाकिफ प्रमोद जी ने कहा कि दिनेश अब तुम देखो क्या इसमें किया जा सकता है। पाकिस्तान से भारत में शादी के बाद आयी बेटियों से बातचीत का आइडिया भी मेरा ही था,इसलिए मैं खुद जुटा। अमर उजाला की पुरानी फाइल खंगालने पर आरएसपुरा में ऐसी एक लडक़ी का पता चला। धूल भरी अखबार की फाइलों को खंगालने के दौरान ऐसी तीन लड़कियों का पता चलने के बाद उनके या उनके घर वालों की प्रतिक्रिया जानने के लिए दो महीने के दौरान जो जनसंपर्क कमाया था, वह काम आया। बालदिवस के एक दिन पहले आरएसपुरा सेक्टर के पास पाक बार्डर जाने के दौरान सेना के जिन जवानों से दोस्ती हुई थी उनमे राजस्थान के साथ यूपी के भी कुछ थे। मोबाइल नंबर पास में ही था। कानपुर के रहने वाले सेना के एक जवान कुलदीप को फोन लगाया तो पता चला कि वह श्रीनगर में पहुंच गया है। बेनजीर भुट्ïटो की मौत की खबर से वाकिफ हो चुके कुलदीप को फोन करने का मकसद बताया तो बोला जहां मैं तैनात हूं, वह सज्जाद मियां का मकान है, उनके घर कुछ पाकिस्तानी मेहमान आए हैं। उनसे बात करा सकता हूं। पाकिस्तान से आए गुलाम रसूल जब फोन पर आए तो सिर्फ इतना कहा कि जनाब हम क्या बताएं अल्ला जाने पता नहीं कौन-कौन सा दिन इस मुल्क को देखने होंगे? गुलाम रसूल के बाद जेहन में जम्मू-कश्मीर वूमेन कमीशन की सेक्रेटरी हाफीजा मुज्जफ्फर का नाम आया तो उनको भी फोन लगाया। वह बोली पाकिस्तान से एक..दो नहीं सैकड़ों बेटियां रियासत में आयी हैं और यहां की सैकड़ों बेटियां पाकिस्तान में भी गयी है। बेनजीर की मौत से खुद सदमे में आ गयी हाफीजा ने पाकिस्तान सरकार को कोसने के साथ ऐसा करने वालों को इस्लाम का कटटर दुश्मन व वहशी तक ठहराने से गुरेज नहीं किया। पाकिस्तान से आयी बेटियों के घर का फोन नंबर देने में असहाय दिखी हाफीजा ने कहा कि कल आफिस आइएगा फिर बात करेंगे, इस मसले पर। डोडा,किश्तवाड़, रियासी जैसे छोटे-छोटे बाजारों में बेनजीर की मौत के खबर के बाद चाय-पान की दुकानों पर पाकिस्तान के हालात को लेकर हो रही चर्चा का इनपुट आता रहा। जम्मू दफ्तर में बैठकर पाकिस्तान से आयी बेटियों की टोह में जुटा रहा। रियासी में एक परिवार के बारे में पता चलने के साथ फोन नंबर  िट्राई करना प्रारंभ किया तो दिस रुट इज बिजी, दिस नंबर नाट वैलिड सहित कई रिकार्डेड जुमले सुनने के बाद आखिरकार बीएसएनएल का नंबर लग गया। परिचय देने के बाद जब हिंदुस्तान की बहू बनी पाकिस्तान की बेटियों से बातचीत  के मकसद से फोन करने की बात बताई तो कयूम मियां ने कहा कि मेरी बहू शबाना इस घटना के बाद गुस्से से लाल है। उसका गुस्सा जायज भी है। दोनों मुल्कों के माहौल में ऐसी घटनाओं का जो असर पड़ता है, उससे ज्यादा तो बहू-बेटियों के रिश्तों की डोर पर फर्क पड़ता है। रात के नौ बज गए थे,लेकिन पाकिस्तान की बेटियों की तलाश में फोन पर फोन करके खोजबीन का मिशन जारी था। रात दस बजे तक दो और पाकिस्तान बेटियां मिल गयी। कोई गुस्से में लाल थी तो कोई खौफजदा। सर्द सरहद पर सदमे के बीच फैली सनसनी में सिसकती सांसों की कहानी पर खबर तैयार हो गयी। कुर्बानी पर बरस पड़ी सांझी बेटियां। बेनजीर की मौत के बाद जम्मू-कश्मीर में हाई एलर्ट के साथ इस खबर को भी पहले पेज पर जगह मिली। आफिस में काम खत्म करके निकलते-निकलते रात के डेढ़ बजे गए थे। सर्द सरहद पर सख्ती का कड़ा पहरा दिखा। आफिस से घर पहुंचने तक रास्ते में कई जगह चेकिंग हुई। घर पहुंचने के बाद हाथ-मुंह धोकर बिस्तर पर आने के बाद सोचने लगा कि हाफीजा ने कल किसलिए बुलाया है?
क्रमश:

1 टिप्पणी:

PRITI ने कहा…

खुदा महफूज रखे मेरे बच्चों को सियासत से
ये वो औरत है जिसने उम्र भर पेशा कराया है............मुन्नवर राणा

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