रोमिंग जर्नलिस्ट

शनिवार, 25 जून 2011

हाफीजा ने फाड़ डाले पाक डायरी के पन्ने

रोमिंग जर्नलिस्ट की रिपोर्ट 18

बेनजीर भुटïटो की मौत के बाद पाकिस्तान का सियासी पारा जितना चढ़ा उससे कम जम्मू-कश्मीर का भी राजनीतिक तापमान नहीं था। रियासत के हिंदी,अंग्रेजी,उर्दू अखबार बेनजीर की मौत की खबर से अंदर-बाहर रंगे हुए थे। आफिस में मीटिंग पहुंचने से पहले सभी अखबारों पर नजर डालने के साथ चाय की चुस्की लेने के दौरान दिमाग में और क्या खबरें इस इश्यू को लेकर की जा सकती है, इसको लेकर मंथन चल रहा था। चाय का आखिरी घूंट पीने के बाद पैसा देकर सिटी बस से विक्रम चौक दस मिनट में ही पहुंच गया। घड़ी की सुई दस बजने का इशारा कर रही थी, आधे घंटे का समय था। तवी नदी के किनारे पहुंच गया। तवी की अविरल धारा को देखकर हाफीजा मुज्जफ्फर से मिलने को लेकर सोचने लगा। तवी नदी के किनारे एक पत्थर पर बैठकर सोच-विचार में ढेरों आइडिया बनते-बिगड़ते रहे। मीटिंग का समय नजदीक आता देखकर बेमन से उठकर तवी के तट से आफिस के लिए चल दिया। आफिस में संपादक जी आने के बाद सबसे पहले सभी अखबारों की समीक्षा करने के साथ अमरउजाला की प्रस्तुति से खुश होने के साथ आज की प्लानिंग पर चर्चा में मशगूल हो गए। कौन क्या करेगा,यह सब तय होने के बाद मैं निकल पड़ा हाफीजा से मिलने। वूमेन कमीशन के दफ्तर पहुंचने पर पता चला कि अभी वह नहीं पहुंची है। फोन मिलाया तो पांच मिनट में दफ्तर पहुंचने की खबर मिली। दस मिनट के बाद काले रंग के सलवार सूट में हाफीजा का आगमन हुआ। दुआ-सलाम करने के साथ उनके कमरे की तरफ चल दिया। ‘...बहुत बुरा हुआ’ बेनजीर की मौत की खबर से गमगीन दिखी हाफीजा ने कहा कि जिस तरह से उनकी हत्या हुई,उसे देखकर तो मुझे लग रहा है, इसके पीछे सियासी हाथ जरूर होगा। लंदन में पढ़ी-लिखी हाफीजा से पूछा कि बेनजीर भुटटो से कभी मिली हैं? उन्होंने जवाब नहीं में देते हुए कहा कि ‘मगर उनके राजनीतिक संघर्ष से बखूबी वाकिफ हूं’। बेनजीर भुटटो की इंदिरा गांधी से तुलना करने वाली हाफीजा ने कहा पता नहीं क्यों मुझे लग रहा है कि इसके पीछे परवेज मुशर्रफ का भी कहीं न कहीं जरूर लिंक होगा। पाकिस्तान के सियासी हालात से शुरू हुई चर्चा आगे बढ़ते-बढ़ते हाफीजा के पाक दौरे की यादों से गुजरने लगी। बात उस समय की है जब देश के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे। पाकिस्तान से दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए अटल जी जब खुद बस लेकर पाक गए थे तो प्रसिद्घ गांधीवादी निर्मलादेश पाण्डेय की अगुवाई में देशभर की महिलाओं का एक दल भी पाक गया था। इस दल में शामिल रही हाफीजा मुज्जफ्फर ने कहा कि पाकिस्तान भले ही हम दोस्ती का पैगाम लेकर गए थे, लेकिन वह दोस्ती लायक है नहीं। पाकिस्तान की चर्चा करते हुए हाफीजा ने यह भी बताया कि दूसरे दिन इस दल की मुलाकात परवेज मुशर्रफ से होना तय थी। परवेज मुर्शरफ आए तो तो वह अपनी मां के बारे में बाते करते हुए बोले कि वह जितना प्यार मुझे करती थी, उतना प्यार आज तक मुझे नसीब नहीं हुआ। मां के लाड़,प्यार,दुलार के किस्से के साथ भारत-पाकिस्तान में महिलाओं की साक्षरता पर चर्चा होने लगी तो मुशर्रफ मियां का मानना था कि औरतों के लिए तालीम बहुत जरूरी है।  जब तक तालीम नहीं मिलेगी तब तक उनके साथ होने वाले भेदभाव और जुल्म को रोका नहीं जा सकता है। सियासत में महिलाओं की भागीदारी की बात चली तो इंदिरागांधी का नाम लेते हुए उनकी काबिलियत पर चर्चा हुई, जब बेनजीर भुटटो का नाम मैने लिया तो परवेश मुशर्रफ के चेहरे पर घिनौनी कुटिल मुस्कान दिखी। बेनजीर की मौत की खबर के बाद परवेज मुशर्रफ का वहीं घिनौना चेहरा बार-बार दिमाग के परदे पर उभरकर आ जाता है। दिनेश तुमको बता रही हूं कि मुझे लग रहा है बेनजीर की मौत में परवेज मुशर्रफ का हाथ है। आज भले ही दुनिया में इस बात को कोई नहीं कह रहा है लेकिन तुम देख लेना वह दिन दूर नहीं जब लोग बेनजीर भुटटो की मौत के लिए इसको ही जिम्मेदार मानेंगे। हाफीजा ने अपनी बात की पुष्टिï के लिए पाकिस्तान दौरे के दौरान लिखी गई उस डायरी को भी दिखाया, जिसमे कई पन्नों पर परवेज मुशर्रफ से मुलाकात के साथ उनके हावभाव का जिक्र किया गया था। मैने उस डायरी को हाफीजा से देखने की गुजारिश की तो उन्होने बेहिचक डायरी मेरे हाथ में दे दी। उस डायरी पर परवेज मुशर्रफ के साथ लाहौर और रावलपिंडी के कुछ ऐसे बाजारों का भी जिक्र था, जिनके बारे में जानकर हर हिंदुस्तानी के कान खड़े हो जाएंगे। हाफीजा की पाक डायरी काफी रोचक लग रही थी। इस डायरी के साथ दिमाग में खबरों की खिचड़ी भी पकने लगी। सोचने लगा कि आखिर इस डायरी का उपयोग किस तरह किया जाए कि अमर उजाला के पहले पन्ने पर जगह मिले। दस मिनट तक डायरी के पन्ने पलटने के साथ दिमाग के मेमोरी कार्ड पर उसको कापी करने का काम भी चलता रहा। पाक डायरी के आखिरी पन्ने को पलटते हुए मैने कहा कि यह तो मुशर्रफ से आपके मुलाकात की यादगार चीज है। यह सुनते ही हाफीजा बोली दिनेश मुझे उस आदमी से नफरत हो गयी है, साथ ही इस डायरी से भी। जी में आता है इसको जला दें। हाफीजा की यह डायलाग सुनकर मेरा दिल इस बात को लेकर खुश हो गया कि बेटा दिनेश जो स्टोरी दिमाग में सोची, उसी दिशा में यह खुद चल रही है। दिल अंदर से भले ही हंस रहा था लेकिन चेहरे पर मातमी भाव पसरा हुआ था। मातमी भाव के बीच एक मिन्नत करते हुए मैने कहा कि अगर आप इस डायरी के पन्ने फाड़ दें तो एक बड़ी खबर मेरे लिए बन जाएगी। हाफीजा बोली मैं तो इस डायरी को ही आग में जला देना चाहती हूं। मैने कहा कि डायरी के पन्ने ही फाडऩा काफी होगा। एक पन्ना खुद फाड़ते हुए उन्होने कहा प्लीज तुम मेरी मदद करो। मैं पाक डायरी के पन्ने फाडऩे में जुट गया। इसके पीछे का मकसद केवल यह था कि दूसरा अखबार वाला आकर इन पन्नों की खोजबीन ना करे। पाक डायरी के पन्नों को फाडऩे के बाद कश्मीरी चाय की चुस्की लेकर वहां से चल दिया। दिमाग में खबर के साथ हेडिंग भी पक गयी थी। हाफीजा ने फाड़ डाले पाक डायरी के पन्ने! यह खबर अमर उजाला के सभी संस्करणों में बेनजीर भट्ïटो की मौत के दूसरे दिन प्रमुखता से छपी। इस खबर को पढक़र जम्मू-कश्मीर के तमाम अखबारों के नुमाइंदे फोन करने लगे कि भाई पाक डायरी के पन्नों में और क्या-क्या था? जवाब था जनाब याद नहीं है, जितना याद है अमर उजाला के पहले पेज पर छपा है पढ़ लिजिए। इस खबर से हुई खुशी को शेयर करने के लिए तवी मइया के पास शाम को पहुंचा, दिल खोलकर हंसते हुए सोचा लाहौर व रावलपिड़ी के बाजार में सूट खरीदने गई हाफीजा ने क्या देखा था जो डायरी में लिखा, उसकी खबर कल लिखेंगे।
क्रमश:

4 टिप्‍पणियां:

PRITI ने कहा…

ek report me kitna kuchh samahit kar diya hai jaise gagar me sagar .sabse mazedaar laga ki upar se to maatmi surat bana rakhi thi magar ander hi ander hansi aa rahi thi ."dil ander se bhale hi hans raha tha par chehre par maatmi bhaw pasara tha " . is se zahir hota hai ki aap ek achchhe actor bhi hain . aakhiri lines padh kar agli kist ki utsukta charamseema par hai ki "haafza ne kya dekha"
jaldi padhwaiyega i m waiting.......

Anupam ने कहा…

Well written.. lekin abhi aur nikhaar laiye!

Anupam ने कहा…

Well written.. lekin abhi aur nikhaar laiye!

dinesh chandra mishra ने कहा…

thx priti ji
anupam ji thx for advice

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