रोमिंग जर्नलिस्ट

सोमवार, 13 जून 2011

हया के डर से हिना बनी आतंकी हथियार

जम्मू यूनिवर्सिटी में एलएलबी की छात्रा नाहिदा राकेट लांचर और आरडीएक्स लेकर जब कश्मीर से जम्मू आ रही थी तो उसको सेना ने तलाशी के दौरान पकड़ लिया। नाहिदा को पकड़े जाने के बाद जम्मू यूनिवसिर्टी के उन लडक़े-लड़कियों पर सेना की खास निगाह हो गयी थी जो कश्मीर से पढऩे आते थे। नाहिदा के पकड़े जाने की खबर सभी अखबारों में पहले पन्ने पर छपी। वहां के पत्रकारों के लिए यह खबर रुटीन खबर जैसी थी, लेकिन मेरे मन-मस्तिष्क में नाहिदा छायी थी। नाहिदा वाकई में आतंकी संगठनों से मिली है या आखिर कौन सी मजबूरी है जो वह यह काम कर रही थी? ऐसे कई सवाल नाहिदा की खबर के तह में जाने के लिए मजबूर कर रहे थे। इस खबर के छपने के दूसरे दिन पहुंच गया जम्मू यूनिवर्सिटी के विधि विभाग में नाहिदा का एजुकेशन बैकग्राउंड पता करने। काफी पापड़ बेलने के बाद खैर पता चला कि नाहिदा पढऩे में बहुत मेधावी थी। उसकी दो सहेलियों से मिला तो पता चला कि नाहिदा हमेशा सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस का ख्वाब बुना करती थी। पिछले एक महीने से वह काफी गुमसुम सी हो गयी थी, उसकी चहक पता नहीं कहां गायब हो गयी थी। नाहिदा के बारे में जितनी जानकारी मिली वह एक खबर के लिए पर्याप्त कही जा सकती थी, लेकिन दिल संतुष्टï नहीं हुआ। जम्मू-कश्मीर वूमेन कमीशन की सेक्रेटरी हाफीजा मुज्जफ्फर ने बताया था कि जब कोई महिला आतंकी पकड़ी जाती है संयुक्त पूछताछ जब होती है तो उसमे उनको या किसी प्रतिनिधि को भी जाना होता है। पिछले दिनों हाफीजा से हुई मुलाकात में यह जानकारी मिली थी। जम्मू-यूनिवर्सिटी से विक्रम चौक की तरफ पैदल चलते ही हाफीजा को फोन लगा दिया। फोन उठाते ही हाफीजा की आवाज गूंजी हैलो मिस्टर जर्नलिस्ट.. हाउ आर यू। मैं ठीक हूं मैडम, आप कैसी हैं? मैं भी ठीक हूं, कैसे याद किया? नाहिदा की खबर की चर्चा करते हुए कहा कि वह तो बहुत मेधावी लडक़ी थी, ऐसे काम कैसे कर सकती है, यह किसी को समझ में नहीं आ रहा है। जम्मू यूनिवर्सिटी के विधि विभाग में कई घंटें की मेहनत के बाद मिली जानकारी जब हाफीजा को दी तो वह चौंक गयी। बोली आज पूछताछ के दौरान सेंट्रल इंट्रोगेशन सेंटर गयी थी, नाहिदा के आंतकी हथियार बनने की कहानी बहुत चौंकाने वाली है। हाफीजा को फोन करने के पीछे का मकसद पूरा होता दिख रहा था। मैने कहा मैडम अगर आपके पास समय हो तो मैं आपके आफिस आ जाऊं । अभी तो रास्ते में हंू, आधे घंटे बाद मैं आफिस पहुंच जाऊंगी। ओके मैडम, मैं आपकी कश्मीरी चाय पीने आता हूं। बात करते-करते विक्रम चौक पहुंच गया था। साइकिल पर पावभाजी की दुकान लगाने वाले पंडित जी मिल गए। पांच रुपए में मक्खन की टिक्की के साथ छोला-मटर की जो पावभाजी वह बनाते थे, एक खा लेने के बाद पेट में पर्याप्त ईंधन महसूस होने लगा। नाहिदा की पूरी कहानी जानने के लिए फिर चल दिया जम्मू कश्मीर वूमेन कमीशन के दफ्तर। आधे घंटे में पहुंच गया। हाफीजा मुज्जफ्फर आ चुकी थी। देखते ही बोली आइए जनाब, कैसे आपके मिजाज है? मैं बोला आपको यहां देखकर ठीक हूं। मेज पर चाभी भरने वाली घंटी घुमाकर बजाया तो चपरासी आ गया। चाय पिलाइए मियां। चाय का हुक्म देने के बाद बातचीत शुरू हुई। नाहिदा के सहेलियों से बातचीत प्रारंभ हुई, उसके सपने, उसकी पढ़ाई का जेयू से मिला रिकार्ड दिखाया तो वह चौंकते हुए बोली लडक़ी पढऩे वाली थी, लेकिन क्या करें बेचारी? मैने कहा समझ में नहीं आया नाहिदा की मजबूरी, ऐसी कौन सी मजबूरी थी जो उसको राकेट लांचर और आरडीएक्स के लिए कैरिएर बनने को मजबूर करे। कुछ न कुछ मजबूरी रही होगी, तभी तो इतनी पढ़ी-लिखी लडक़ी ने यह काम किया। आखिर कौन सी मजबूरी रही होगी? काफी कुरेदने के साथ आफ द रिकार्ड बातचीत रखने पर हाफीजा पूरी कहानी बताने को राजी हुई। मान-मनौव्वल के दौरान कश्मीरी चाय आ चुकी थी। चाय की एक चुस्की लेने के बाद हाफीजा बोली, सेंट्रल इंट्रोगेशन सेंटर जाने पर उसका हुलिया देखकर मैं खुद परेशान हो गयी। कश्मीर की हूर दिखने वाली नाहिदा पूछताछ के दौरान हद से अधिक डरी और सहमी थी। वहां पर दर्जनभर से ज्यादा विभिन्न जांच एजेंसियों के अधिकारियों के बीच तीन महिला कांस्टेबिल किनारे तमाशबीन बनकर खड़ी थी। कोई पूछ रहा था लश्कर-ए-तोयबा से कैसे जुड़ी हो?, पाकिस्तान ट्रेनिंग के लिए गयी हो क्या? ऐसे कई चुभने वाले सवालों के बीच नाहिदा का हाल देखकर मुझे उस पर तरस आ गया। मैने अधिकारियों से कुछ देर के लिए उसको अकेला छोडऩे को कहा। नाहिदा के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा कि बेटी तुम घबड़ाओ मत। तुम मुझे अपनी मां समझकर सब बताओ। मां का नाम सुनकर मेरी ओर जब नाहिदा मुखातिब हुई तो उसके चेहरे पर जम गए आंसुओं को पोछते हुए कहा बताओ बेटी तुमको न्याय मिलेगा, अगर तुमने कोई गलती नहीं की होगी तो रियासत की सरकार भी तुम्हारी मदद करेगी। चाय का आखिरी घूट पीते हुए हाफीजा ने बताया कि दस मिनट तक ढांढ़स देने के बाद नाहिदा ने रोते हुए जुबान खोली। बताया दो महीने पहले हमारे गांव(डोडा के नजदीक) में कुछ चरमपंथी आए, रात का समय था। मैं उस वक्त खाना पका रही थी, मां की तबियत खराब थी, उसको कमरे में बंद कर दिया। खाना खाने के बाद उन सबने मेरे साथ रेप किया। मेरी अश्लील फोटो बंदूक की नोक पर खींची। मेरे मुंह में एके-47 की नोंक डालकर कई तरह से फोटो खींचने के बाद दिखाया और कहा कि अगर कुछ बोलोगी तो तुम्हारी पिक्चर पूरे गांव के साथ जम्मू यूनिवर्सिटी में लगवा दी जाएगी। कहीं की नहीं रहोगी। मैं उनके जाने के बाद बहुत रोई। मां को सारी बात बतायी। मां ने कहा कि बेटी हम लोगों की किस्मत में यहीं सब लिखा है। एक महीने बाद उनमे से एक मुझे घर में एक खत दे गया। इस खत में लिखा था कि जम्मू एक सामान ले जाना है, इसको जम्मू पहुंचा देना, अगर यह काम नहीं करोगी तो तुम्हारी फोटो पूरे रियासत में बांट दी जाएगी। उसकी यह धमकी सुनकर बहुत घबड़ा गई, समझ में नहीं आ रहा था क्या करे। एक तरफ हया दूसरी तरफ आतंकी हथियार बनने की मजबूरी। आखिर में मैने इस पार्सल को जम्मू पहुंचाने का फैसला किया और रास्ते में पकड़ी गयी। रोते-रोते हुए नाहिदा ने पूरी आपबीती सुनाते हुए कहा कि दीदी मैं लश्कर-ए-तोयबा की आतंकवादी नहीं हूं। प्लीज दीदी मुझे बचा लीजिए। नाहिदा की आपबीती हाफीजा के मुंहजुबानी सुनने के बाद वहां से चल दिया। रास्ते में सोचने लगा कि आखिरी स्टोरी क्या बनाया जाए। हाफीजा से आफ द रिकार्ड बातचीत का टेप भले ही मेरे जेब में मौजूद मोबाइल में रिकार्डेड था, लेकिन क्या स्टोरी बनाए? यही सब सोच-विचार करते हुए मैं आफिस पहुंच गया। आफिस में कम्प्यूटर के सामने बैठने के बाद काफी सोचने के बाद स्टोरी बनायी ‘हया की डर से आतंकी हथियार बन गई हिना।’ इसमें काल्पनिक नाम ‘हिना’ से नाहिदा की आपबीती बताते हुए खबर बनायी। आखिर में जम्मू-कश्मीर वूमेन कमीशन की सेक्रेटरी की सचिव को भी बयान के लिए राजी करते हुए उनका भी जिक्र किया। उनका बयान था ऐसे मामले आयोग के संज्ञान में आए हैं, इन पर आगे कार्रवाई की जाएगी। स्टोरी संपादक जी को दिखाने के साथ पूरी बात बतायी। वह स्टोरी पढऩे के बाद अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि कश्मीर में तमाम लड़कियों के साथ आतंकवादियों का यह सलूक वहां के कट्ïटरपंथियों को नहीं दिखाई देता। सब साले अंधे हैं। खैर खबर संवेदनशील थी, नोएडा में समूह संपादक शशिशेखर के ध्यानार्थ भेजी गयी। खबर के बारे में देररात को नोएडा से जानकारी मिली कि बास ने खबर को न छापने को कहा है। बास इज आलवेज राइट का जुमला आज भी याद है, लेकिन इतनी शिद्ïदत के साथ बनाई गई खबर न छपने की बात पता चली तो मूड आफ हो गया। रुटीन का काम निपटाकर गांधीनगर की ओर रात में जब चला तो रास्ते में इस खबर की चर्चा छिड़ गयी। समूह संपादक जी के प्रति शब्दों से कितना गुस्सा उतारा इसको लिखूंगा तो मामला अंससदीय हो जाएगा। रात में अपनी स्टोरी की खुशरंग नहीं बदनसीब हिना याद आती रही, इसी सोच-विचार में सो गया। सबेरे समूह संपादक का एक संदेश मेरे लिए जम्मू के संपादक के पास था। मीटिंग के बाद संपादक जी ने कहा कि बिग बास ने कहा है दिनेश से कह दो ज्यादा जेहादी न बने, उतना ही बने, जिससे अमर उजाला भी सुरक्षित रहे और वह खुद भी। बिग बास का यह संदेश सुनने के बाद उनको दिल से धन्यवाद बोलते हुए फिर खबर की खोज में निकल पड़ा।
क्रमश:

7 टिप्‍पणियां:

gyan ने कहा…

पाकिस्तान की खुशरंग हिना राजकपूर की हिना में दिखी थी, एक हिना दिनेश तुम्हारी इस स्टोरी में दिखी। दोनो की अजीब कहानी है। कश्मीर का यह सच जानकर दिल दुखने के साथ तुम्हारी खबर की तह में जाने की आदत को देखकर लखनऊ अमर उजाला की लांचिंग की मेहनत याद आ गयी। जय हो

ramesh chandra ने कहा…

कश्मीर के हालत पर यह खबर काफी पीड़ादायक है। आज भी वहां हालात नहीं बदले हैं।

Ishank ने कहा…

नाहिदा की दासता बहुत दर्दनाक महसूस हुई... पता नहीं क्यों भगवान ऐसे मासूम लोगो को हैवानो को शिकार बनाता है.... नाहिदा जैसी मासुस लड़की के जीवन का लक्ष्य ही बदल गया... सोच कर भी घिन आती है उन लोगो की हेवानियत पर...

dinesh ने कहा…
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PRITI ने कहा…

RAKHI THI SHAHAR KI BUNIYAAD KAISE LOGON NE , YE KAUN LOG HAIN JINME BHATAK RAHI HAI HAWA ,SAHAR KUCHH AUR THA AUR AB YE HAAL BAAGH KA HAI , KI PAANW RAKHTE HUE BHI THITHAK RAHI HAI HAWA ...... ( PARVEEN SHAQIR )

mkukesh chandra ने कहा…

बहुत बढिया दिनेश जी, इस स्टोरी ने आत्मा को झंकझोर दिया। बहुत कुछ इस लेख से सिखा। इसके लिए बहुत—बहुत बधाई--
मुकेश चंद्रा

राहुल सांकृत्यायन ने कहा…

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