रोमिंग जर्नलिस्ट

सोमवार, 6 जून 2011

इतिहास चीरकर लिखेगा एक चिनार अपना नाम

रोमिंग जर्नलिस्ट की रिपोर्ट 14
लंदन में पढ़ी लिखी हाफीजा मुज्जफ्फर को फिरदौस के साथ आतंकवादियों द्वारा की गयी जुल्म-ज्यादती का मामला सौंपने के बाद दिल में बहुत सुकून मिला। जम्मू-कश्मीर वूमेन कमीशन के दफ्तर से लौटते हुए विक्रम चौक से पहले ही रघुनाथ मंदिर के पास उतर गया। पता नहीं दिल क्यों किया आज फिर रघुनाथ मंदिर में भगवान का दर्शन किया जाए। मंदिर में दर्शन करने गया तो गाजीपुर वाले अजब सिंह यादव बाहर ही टकरा गए। मुझे देखते ही उनकी आंखों में आज वही चमक दिखाई पड़ी, जो पहले पहल इसी मंदिर में मिलने पर उनका नाम पढऩे के बाद मुझे महसूस हुई थी। ..आइए गुरु जी! गुरु सुनकर बनारसीपन का ऐसा अहसास हुआ कि मजा आ गया। हाथ मिलाने के बाद मंदिर में दर्शन करने से पहले चाय पीने की गुजारिश को विनम्रता पूर्वक कुछ देर के लिए स्थगित करके अंदर चला गया। दर्शन करके बाहर लौटा तो मंदिर के सामने मौजूद एक चाय की दुकान पर ले गए। चाय का आर्डर देने के बाद बोले गुरु जी आप से बातचीत के बाद दूसरे दिन जब गाजीपुर में गांव के साथ अन्य जानने वालों ने फोन करके बधाई दी तो मामला समझ में नहीं आया। शाम को जब आसमान में चांद दिखाई देने के बाद पत्नी को फोन किया तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बोली आज आपका नाम अमर उजाला में निकला है। गांव भर में आपकी चर्चा के साथ मेरी भी करवाचौथ से जुड़ी खबर होने के कारण हो रही है। मैने गुरु जी पत्नी को करवाचौथ की शुभकामना दी, लेकिन आपने जो खबर लिखी थी उसे पढक़र उसका दिल पहले ही बाग-बाग हो चुका था। गुरु जी मजा आ गया। अजब सिंह मेरी तारीफ में पुल बांध रहे थे, लेकिन मैं अपनी पत्नी का उस खबर के बारे में फोन पर मिले कमेंट्ïस को याद करने लगा। करवाचौथ के दिन ही अमर उजाला के कई संस्करणों में छपी इस रिपोर्ट को पढक़र पत्नी ने कहा कभी पत्रकारों की पत्नियों की पीड़ा पर भी खबर बनाइए। जेहन में आयी इस बात को जुबान तक न लाकर अजब भाई की दास्तान सुनता रहा। चाय का कप हाथ में आ गया था बोला भाई अपना काम खबर लिखना। यह संयोग की बात है आप अपने इलाके के ही निकल आए। चाय पीने के बाद अजब सिंह यादव से विदा लेकर आफिस के लिए चल दिया। जम्मू कश्मीर वूमेन कमीशन की सेक्रेटरी हाफीजा मुज्जफर से मिलने के बाद जेब में खबरों की कमी नहीं थी, लेकिन अपने पास खबरें और भी थी। लखनऊ के रहने वाले भारतीय वन सेना के आरसी शर्मा से मिलने के बाद जो खबरें मिली थी, उसमें एक खबर काफी रोचक थी। वह थी चिनार के पेड़ के  बारे में। कश्मीर स्थित दुनिया के सबसे पुराने चिनार के पेड़ को ऐतिहासिक धरोहर बनाने की दिशा में वन विभाग द्वारा कदम उठाने के लिए क्या प्रस्ताव बनाया जा रहा है। इस पर चर्चा हुई थी। देश के सबसे पुराने चिनार के पेड़ पर रिपोर्ट बनाने का प्लान बनाया। बडग़ाम जिले के छत्तरगाम गांव में स्थित चिनार के एक विशाल पेड़ को दुनिया का सबसे पुराना चिनार होने का गौरव हासिल है । गांव में स्थानीय जियारत से कुछ दूरी पर स्थित यह पेड़ गांव वालों की आस्था का प्रतीक भी है।   इसके बावजूद यह अतिक्रमण की मार झेल रहा है । यूरोप में भी एक ऐसी जगह है जो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। गूगल बाबा से इसकी जानकारी मिलने के बाद हमने इस पेड़ को बतौर ऐतिहासिक धरोहर व पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करने की दिशा में शर्मा जी के प्रयासों के साथ पर्यटन विभाग के अधिकारियों से बात करके खबर बनायी। लगे हाथ बडग़ाम के डीसी से बात हुई तो उन्होंने कहा कि पर्यटन इस गांव की रूपरेखा बदल सकता है और यह पेड़ इनके लिए तरक्की का माध्यम होगा। उन्होंने कहा कि पेड़ तक पहुंचने के लिए कम से कम सडक़ तो खुली मिलनी चाहिए व उसके नीचे बैठने की जगह होनी चाहिए। छत्तरगाम में चिनार का पेड़ दुनिया का सबसे विशाल और बड़ा चिनार है । इस पेड़ को सन् 1374 में सैय्यद कासिम ने लगाया था। यह पेड़ शुरू से ही लोगों की आस्था का केन्द्र रहा है। इसका व्यास 31.85 मीटर और ऊंचाई 14.78 मीटर है। इस पेड़ का संरक्षण अब बतौर सांस्कृतिक व ऐतिहासिक धरोहर की तर्ज पर करने के वन विभाग की खबर को आकर्षण बनाने के लिए हेडिंग दिया..इतिहास चीरकर का लिखेगा एक चिनार अपना नाम। चिनार पेड़ की महत्व को देखते हुए हेडिंग मुझे अच्छी लगी। संपादक जी के आने से पहले पूरी रिपोर्ट तैयार करने के बाद उनके आने से पहले मेज पर रख दी। संपादक प्रमोद भारद्वाज जी आए तो वह भी खबर देखकर खुश हो गए। अचानक उनके कमरे की घंटी बजी चपरासी से मुझे बुलवाया। अंदर घुसते ही बोले दिनेश तुम्हारी खबर पढक़र मजा आ गया। अगर इस तरह की खबर रोजाना अखबार में एक या दो हो तो अखबार ‘बम-बम’ है। खबर पढक़र खुश प्रमोद जी ने कहा कि दिनेश इसको सभी संस्करणों में भेज दो। खबर फाइनल होते ही सभी संस्करण में चल गयी। नोएडा ने देश-विदेश का जो पेज बनाया उसमें आठ कालम फोटो के साथ खबर डिस्पले की। नोएडा डेस्क से खबर का डिस्प्ले देखकर दिल खुश हो गया। जम्मू में खबर पहले पन्ने पर प्रमुखता के साथ ली गई। खबर छपते ही जम्मू-कश्मीर सरकार भी हरकत में आ गई। सरकार का दरबार जम्मू आया था। आमतौर पर उर्दू और अंग्रेजी अखबारों की खबरों को संज्ञान में लेने वाले मुख्यमंत्री ने हिंदी अखबार की इस खबर को भी संज्ञान में लिया। सरकारी न्यूज एजेंसी ने शाम को इस पेड़ के बारे में खबर रिलीज की चिनार के इस पेड़ को वल्र्ड हेरिटेज में शामिल कराने के लिए रियासत की सरकार केंद्र सरकार को मसौदा भेजेगी। इसके साथ उस पेड़ के नीचे पर्यावरण दिवस पर विशेष आयोजन होगा। चिनार के इस पेड़ को पर्यटन स्थल घोषित करने की दिशा में विचार किया जाएगा। इस पेड़ को लेकर अपनी स्टोरी में जितने भी प्रो-एक्टिव होकर आइडिया डाले गए थे, उस दिशा में जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा सोचे जाने और प्रयास किए जाने की खबर मिलने के बाद वाकई में प्रसन्नता हुई। सबसे ज्यादा खुशी तब हुई जब जम्मू-कश्मीर वूमेन कमीशन की सेक्रेटरी हाफीजा ने फोन करके फिरदौस के बारे में हुई बातचीत और राज्य सरकार को कार्रवाई के साथ मदद की सिफारिश संबंधी रिपोर्ट भेजने की बात बतायी। फोन रखने से पहले उसने चिनार की खबर की तारीफ करते हुए कहा कि उस पेड़ के नीचे मेरी ढेरों रोमांटिक यादें जुड़ी हैं। मैने कहा कि आपकी मोहब्बत इस चिनार की तरह सलामत रहे, यह मेरी दुआ है। यह सुनकर हंसते हुए वह बोली.. यू आर सो क्रेजी। 
                     
क्रमश:

3 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

सर आपका कोई जवाब नहीं है। चिनार जिस तरह इतिहास चीरकर अपना नाम लिख रहा है कश्मीर में, उसी तरह आप लोगों के दिल में अपना नाम अपने काम से लिख देते हैं। दैनिक जागरण से आपके जाने के बाद आप जैसे बड़े भाई की कमी बहुत खल रही है। आपके साथ काम करने का जो आनंद चंद महीने ही ले सका, इसका मुझे कोफ्त है। पश्चिम बंगाल में जिस तरह आपने खबरों की बेटिंग की, वह बेमिसाल है। कश्मीर में आपके काम को पढऩे के बाद मेरा दिल कह रहा है कि आपके साथ वहां क्यों नहीं था। एक बार मौका दीजिएगा सर।

Binay ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Binay ने कहा…

Nice piece of writing sirji. Keep it up.
Binay

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