रोमिंग जर्नलिस्ट

शुक्रवार, 3 जून 2011

‘हिंदुस्तान की गांधीवादी’ पाक में आवारा औरत!

रोमिंग जर्नलिस्ट की रिपोर्ट 13
‘हिंदुस्तान की गांधीवादी’ पाक में आवारा औरत!
नाम- हाफीजा मुज्जफर, उम्र चालीस पार, कद पांच फुट आठ इंच से कम नहीं होगा। हल्के हरे रंग के सलवार-सूट के साथ सिर पर दुपटटा ओढ़े, हाथ में किसी उर्दू नामानिगार की किताबों में खोई हाफीजा को देखकर कुछ देर के लिए ठिठक गया। सोचने लगा कि डिस्टर्ब करें या ना करें। एक क्षण के लिए दिमाग में उभरे इस सवाल को वहीं दफन करकमरे के अंदर दाखिल हो गया। अध्ययन में खलल पडऩे पर मेरी ओर मुखातिब हुई हाफीजा कुछ पूछती इसके पहले ही अपना परिचय दिया। एक मीठी मुस्कान के साथ बैठने के लिए कहते हुए कहा आठ महीने पहले एक उूर्द अखबार के पत्रकार आए थे, उसके बाद आप आए हैं। कहिए मैं आपकी क्या मदद कर सकती हंूं। मैने कहा कि मैं आपको अक्सर खबरों के लिए डिस्टर्ब करता रहूंगा। बातचीत से पहले हाफीजा ने आईकार्ड मांगा तो अमर उजाला बनारस का ही कार्ड दिखाया। दिनेश चंद्र मिश्र नाम उच्चारण के साथ पढ़ते हुए बोली आपका तो यहां का कार्ड ही नहीं है। मैने बताया अभी एक महीने आए हुआ है, इसलिए कार्ड बनने में देर हैं, अगर आपको मेरे ऊपर कोई शक हो तो अमरउजाला दफ्तर या संपादक जी को फोन कर सकती हैं। मेरी बातों को सुनकर मुस्कराते हुए हाफीजा बोली ऐसी कोई बात नहीं है। सुरक्षा कारणों से यहां कब कौन किस शक्ल में आ जाए कहां नहीं जा सकता है। काशी से जम्मू-कश्मीर कैसे पहुंच गए, छोटी सी कहानी बताने के बाद जेब में पड़े फिरदौस की मां की दरख्वास्त निकालकर हाथ में पकड़ लिया। श्रीनगर के पास फिरदौस के साथ जो आतंकवादियों ने जुल्म किया, उसका जिक्र करते हुए गर्वमेंट मेडिकल कालेज में भर्ती होने की पूरी कहानी सुनाई। दिल से गहरा अफसोस जाहिर करते हुए हाफीजा ने कहा कि यहां की बदकिस्मती है कि महिलाओं के साथ ऐसा बर्ताव हो रहा है। बलात्कार की शिकार फिरदौस की मां जाहिरा का उूर्द में लिखा प्रार्थनापत्र देते हुए कार्रवाई की गुजारिश की। जाहिरा का प्रार्थनापत्र हाथ में लेते हुए कहा कि यहां महिलाओं के साथ जुल्म-ज्यादती जहां कम नहीं हो रहे हैं, वहीं चाहकर भी महिला आयोग कुछ कड़ा कदम नहीं उठा पा रहा है। इसके पीछे का कारण पूछने पर हाफीजा ने सबसे पहले रियासत में वूमेन कमीशन के ढांचे के बारे में बताने के साथ मूलभूत सुविधाओं की बदहाली का बखान किया। पंद्रह दिन श्रीनगर और पंद्रह दिन जम्मू में बैठने के बाद भी महिलाओं के उत्पीडऩ के मामले में कार्रवाई न हो पाने की पीड़ा का जिक्र करते हुए उनके चेहरे पर इसका दर्द साफ दिखाई पड़ रहा था। वूमेन कमीशन का हाल जानने के बाद जाहिरा के प्रार्थनापत्र पर क्या कार्रवाई और मदद हो सकती है? यह सवाल उसकी तरफ उछाला तो बोली आज ही उसका बयान लेने जाएंगे। बयान होने के बाद सरकार को इस मामले में कार्रवाई के लिए लिखने के साथ आर्थिक मदद की भी सिफारिश करेंगे। घटनाक्रम में हाफीजा की दिलचस्पी देखते हुए दिल में इस बात का संतोष हुआ कि फिरदौस के चेहरे पर नूर वापस न भी लौटे लेकिन घाव पर कुछ तो मरहम लगेगा।
फिरदौस के मामले पर चर्चा करने के दौरान एक और बात सामने आयी कि जम्मू-कश्मीर में महिलाओं की साक्षरता दर कम होने से ऐसी घटनाएं तमाम होती है, लेकिन उनकी आवाज कहीं नहीं उठती है। फिरदौस का मामला वूमेन कमीशन के सामने लाने पर शुक्रिया कहने के साथ चाय का आर्डर दिया। चाय आने तक दिमाग में यहां से कुछ और खबर निकालने की तरफ ध्यान केंद्रित किया। बातचीत के दौरान हाफीजा ने बताया कि वह लंदन के स्कूल आफ इकनामिक्स में पढ़ी है। हाफीजा की पढ़ाई और जानकारी के चलते उसके प्रति मेरी दिलचस्पी बढ़ती जा रही थी, पूछा वूमेन कमीशन में आने से पहले क्या किया। बताया देश की प्रसिद्घ गांधीवादी निर्मला देशपाण्डेय के साथ समाजसेवा करती रहीं। जम्मू-कश्मीर में महिलाओं के लिए काम करने की ललक देखकर निर्मला देशपाण्डेय अपने साथ पाकिस्तान दौरे पर भी ले गयी थी। बात उस समय की है जब देश में अटल जी पहली बार प्रधानमंत्री बने थे। वह खुद बस लेकर पाकिस्तान गए। इसके साथ महिलाओं का एक दल निर्मलादेशपाण्डेय की अगुवाई में लाहौर गया। नाम रखा गया शांति का कारवां। इस दल का वहां की मशहूर समाजसेवी महिला आसमां जहांगीर ने खैरमकदम किया। सिगरेट पीने की आदी आसमां के साथ महिलाओं ने मोमबत्ती जलाकर भारतीय महिलाओं का स्वागत किया। दूसरे दिन लाहौर के अखबारों को देखकर तो सबका माथा ठनक गया। लाहौर के अखबारों ने छापा कि पाकिस्तान की आवारा औरतों ने हिंदुस्तान की बदनाम औरतों का सिगरेट के छल्ले उड़ाकर स्वागत किया। पाकिस्तानी मीडिया को कोसते हुए हाफीजा ने कहा कि हिंदुस्तान की मीडिया दुनिया में सबसे अच्छी है। पाक मीडिया का हाल सुनने के दौरान कश्मीरी चाय सामने आ गयी थी। कश्मीरी चाय का जायका लेने के साथ यह जानने में लगा रहा कि जम्मू-कश्मीर में वूमेन कमीशन के सामने एक साल के दौरान कितने मामले आए, कितने में क्या कार्रवाई हुई। जुबानी याद आंकड़ा बताते हुए हाफीजा ने कहा कि जागरुकता कम होने के कारण अधिकांश मामले यहां तक नहीं आ पाते हैं। आतंकवादी संगठनों की सक्रियता के कारण किस कदर महिलाओं के ऊपर जुल्म होते हैं? आतंकवादी संगठनों की मदद में हाल के दिनों में कई महिलाओं की खबर सामने आयी थी। इन महिलाओं की मजबूरी पर चर्चा हुई तो पता चला कि जे एंड के में अगर कोई महिला आतंकवादी संगठन की मदद या सांठगांठ के आरोप में पकड़ी जाती है तो केंद्रीय खुफिया जांच एजेंसियों पूछताछ के दौरान मैं या मेरे द्वारा नामित कोई महिला जरूर रहती है। ऐसी महिलाओं की मजबूरी की बड़ी दर्दनाक और लंबी कहानी है। आज नहीं फिर आइएगा मेरे साथ चाय पीने तब इस बारे में आगे बात करेंगे। वूमेन कमीशन की भूमिका सहित ढेरों बातचीत करते हुए एक घंटे से ज्यादा वक्त बीत गया, लेकिन बातचीत से पेट नहीं भरा था। मैने घड़ी की सुई देखते हुए हाफीजा से विदा लेते हुए कहा कि आप जाहिरा और फिरदौस से मिल लीजिए हम फिर आपको तकलीफ देंगे कि इस मामले में क्या हुआ? हाफीजा को खुदा हाफिज करके बाहर निकलते ही गर्वमेंट मेडिकल कालेज की नर्स रेशमा को फोन मिलाते हुए आज की मीटिंग के बारे में बताया और कहा कि आज शाम को या कल सबेरे हाफीजा फिरदौस से मिलने जाएंगी। रेशमा मेरे भागदौड़ से खुश होते हुए ढेरों दुआएं देने लगी। मैने कहा दुआएं तब देना जब फिरदौस के चेहरे पर नूर वापस लौट आए।

क्रमश:  

1 टिप्पणी:

pramod ने कहा…

sir appki journalism journey ka jor abhi tak kisi kio nahi dekha. kashi se kashmir, delhi see darjeeling abb lucknow se kanha ki tayre hai sir

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