रोमिंग जर्नलिस्ट

बुधवार, 18 मई 2011

फिरदौस के नूरानी चेहरे पर जुल्म का फोड़ा


रोमिंग जर्नलिस्ट की रिपोर्ट 9
रात भर दिमाग में रेशमा की कद,कïाठी नाचने के साथ एक सवाल उमड़-घुमड़ रहा था कि आखिर उसके बुलाने के पीछे मकसद क्या है? इन्हीं सब सोच-विचार में जाने किस समय नींद आ गयी। सबेरे नींद खुली तो घड़ी में नौ बज रहे थे। जम्मू का जाड़ा आलस की बेडिय़ां बन गया था। रेशमा की याद आते ही शरीर में पता नहीं कहां से ऊर्जा आ गयी कि चट से बिस्तर छोड़ दिया। ब्रश में पेस्ट लगाकर बाथरुम की तरफ बढ़ा तो अनिमेष पहले से कब्जा करके कोई पुराना हिंदी फिल्मी गाना गुनगुना रहा था। दरवाजे के बाहर से मैने आवाज लगायी बास बाहर जल्दी आओ,मुझे मीटिंग में जाना है। देर हो जाएगी तो संपादक जी..क्लास लेंगे। दस मिनट के अंदर फ्रेश होने के बाद स्नान के नाम पर हाथ-मुंह धोकर तैयार हो गया। घर से बाहर निकलकर चाय पीने के लिए बाहर एक होटल पर पहुंचा तो अखबार के साथी विनोद सिंह जागिंग सूट में मिल गए, पूछा आफिस नहीं जाना है क्या? आज मूड नहीं है अभी संपादक जी को फोन करके छुट्ïटी ले लूंगा। इधर-उधर की बातचीत के साथ चाय पीने के बाद सिटी बस पकडक़र विक्रम चौक के लिए चल दिया। अमर उजाला का समूह संपादक बनने के बाद शशि शेखर ने सभी संस्करणों में रिपोर्टरों के लिए रोजाना दो खबरों की लिस्ट मीटिंग में लाने का फरमान जारी किया था। बनारस में ही उसकी आदत पडऩे के साथ साथियों को भी इसके लिए उत्प्रेरित करने का काम किया था। यहां भी मीटिंग में वहीं फार्मूला चल रहा था। आज पहली बार संपादक ने खबरों की लिस्ट मांगी, सर लिस्ट नहीं है। दिनेश जी कल से आप भी लिस्ट देंगे। खैर मैने संपादक जी को बताया कि आज गर्वमेंट मेडिकल कालेज जाने का प्लान बनाया है। जयहिंद सुनकर बस में झटका खाने वाली रेशमा की कहानी जानबूझकर नहीं बतायी। मीटिंग के बाद बस पकडक़र रेहड़ी के लिए निकल पड़ा। रेहड़ी से पैदल ही शार्टकट से पूछते हुए जीएमसी पहुंच गया। कहने को तो यह मेडिकल कालेज था, लेकिन दुव्यर्वस्था का आलम यह था कि यूपी के किसी छोटे जनपद का जिला अस्पताल भी इससे बेहतर होता है। सुरक्षा कारणों से मेडिकल कालेज के अंदर जाने से पहले मरीजों को परचा या पास दिखाना पड़ता था। गेट पर पहुंचा तो जेके पुलिस के जवानों ने रोक लिया। परिचय देने के साथ कार्ड दिखाने पर अंदर जाने को मिला। मेडिकल कालेज के अंदर जाकर रेशमा के मोबाइल पर एसएमएस किया मैं तुम्हारा इंतजार इमरजेंसी के सामने कर रहा हूं। एसएमएस का दो मिनट में जवाब आया, पांच मिनट के भीतर आ रही हूं। बस में सलवार-सूट में मिली रेशमा नर्सों की पोशाक में जब सामने आयी तो एकटक उसको देखता ही रह गया। आप मेरे साथ आइए जनाब। यह सुनकर मैं रेशमा के पीछे चल दिया। दूसरी मंजिल पर नर्स रूम में ले जाकर बैठने को कहकर कुछ देर में आने की बात कहकर वह चली गयी। रेशमा आखिर किसलिए बुलाई है, यहां लाकर बैठाने के पीछे माजरा क्या है? इसको लेकर दिमाग में सवाल दर सवाल पैदा हो रहे थे। उस रूम में आने वाली नर्सो को देखने के साथ उनकी डोगरी और कश्मीरी में हो रही बातचीत को सुनने के साथ समझने के लिए दोनों कान आजाद छोड़ दिए थे। दस मिनट बाद रेशमा लौटी तो उसके साथ पचास साल की कश्मीरी महिला भी थी। रेशमा ने बताया है यह है जाहिरा इनकी बेटी के साथ सिरफिरों ने गलत काम किया है। सोपोर की रहने वाली जाहिरा की बेटी फिरदौस के साथ गलत काम करने के साथ किसी से कहने पर जान से मारने की धमकी दी गई है। इस घटना के बाद बेटी की हालत खराब है। इस मसले को यहां का मीडिया तवज्जों नहीं दे रहा है। मुझे पता नहीं क्यों लगा कि आप कुछ मदद कर सकते हैं, इसलिए मैंने आपको अपना नंबर दिया और बुलाया है। मैने जाहिरा की बेटी से मिलने की रेशमा से इच्छा जाहिर की तो बोली वह जनाना वार्ड में है, वहां मर्दो का जाना प्रतिबंधित है, वहां आपको नहीं ले जा सकती हूं। जाहिरा की मां को इसलिए आपसे मिलाने के लिए बुलाकर लायी हूं। जाहिरा से पूछा बेटी के साथ जो कुछ हुआ है, उसका मुकदमा दर्ज कराया है? आतंकियों के डर से मुकदमा दर्ज न कराने वाली जाहिरा की मदद फिर कैसे की जा सकती है? यह सवाल मैने रेशमा से पूछा तो वह बोली आपको इसकी मेडिकल रिपोर्ट की फोटो कापी दे देती हूं, आप खबर निकाल दीजिए ताकि रियासत के अफसरों की बंद आंख खुले। नईदिल्ली में पढ़ी-लिखी रेशमा ने कहा कि इसकी मदद के लिए आप एक काम और कर देते तो खुदा आपकी मदद करेगा? मैने पूछा क्या वह बोली जम्मू-कश्मीर वूमेन कमीशन में इस मसले को अगर आप पहुंचा देते तो इसकी कुछ मदद हो जाती है। जाहिरा की बेटी फिरदौस की मेडिकल रिपोर्ट के साथ रेशमा से मैने कहा कि जम्मू-कश्मीर वूमेन कमीशन की सेक्रेटरी के नाम एक दरखास्त बनाकर मुझे दे दो। रेशमा ने उर्दू में वूमेन कमीशन की सेक्रेटरी के नाम प्रार्थनापत्र बनाने के साथ जाहिरा से उस पर अंगूठा लगवाकर मुझे थमा दिया। फिरदौस का मामला वूमेन कमीशन ले जाने के साथ अखबार में भी इसकी रिपोर्ट करने का आश्वासन दिया जो जाहिरा ने ढेरों दुआएं कश्मीरी में दी। जाहिरा को बेटी के पास जाने के लिए रेशमा ने कहा और मुझसे चाय पीने के लिए कहकर कैंटीन की तरफ चल दी। कैंटीन में चाय की चुस्कियों संग वह काशी से कश्मीर कैसे आएं,शादी हो गयी है कि नहीं,आपको कश्मीर कैसा लग रहा है? सहित ढेरों सवाल पूछती रही। मैं खूबसूरती की उस बेमिसाल जीवंत मूर्ति को देखते हुए सबका जवाब देता रहा। फिरदौस की रिपोर्ट अखबार में छपने के बाद फिर फोन करने को कहते हुए जब विदा लेने के मूड में दिखी तो मैने पूछा कल बस में जय हिंद सुनकर तुमको झटका क्यों लगा? इस सवाल को सुनकर वह कैंटीन की टूटी बैंच पर फिर बैठ गयी। अगल-बगल देखा तो नजदीक में कोई नहीं था, बोली हम श्रीनगर के जिस इलाके से आए हैं, वहां हिंदुस्तान की तरफदारी करना किसी गुनाह से कम नहीं है। अलगाववादी संगठन इतने हावी हैं कि जयहिंद सार्वजनिक स्थान पर कोई सिविलिएन अगर बोल दे तो उसकी खैर नहीं। इसी माहौल में मेरी परिवरिश हुई, इसीलिए इससे वाकिफ हूं। इस कारण एक बारगी बस में जय हिंद सुनकर चौंक गयी थी.. आपको बुरा लगा क्या? बोला ऐसी कोई बात नहीं है। रेशमा अपने जवाब से मुझे संतुष्टï देखकर बोली कि फिरदौस के चेहरे का नूर फना हो गया है, आप प्लीज खुदा के वास्ते कुछ कीजिएगा। इंशाअल्लाह कुछ न कुछ इस मसले पर जरूर करेंगे, तुम इस हिंदुस्तानी पर विश्वास कर सकती हो। मैं अब चलता हूं फिर मिलेंगे। रेशमा को खुदाहाफिज संग जय हिंद बोलकर दस कदम ही चला था कि उसकी आवाज सुनाई पड़ी..एक मिनट और सुनिएगा। उल्टे पैर उसके पास फिर पहुंचा तो बोली .. ‘जय हिंद’। रेशमा का जय हिंद बोलना दिल को छू गया, दिमाग में फिरदौस का फना हो गया नूर वापस लाने के लिए क्या किया जाए? यह सवाल छा गया था कि फिरदौस के नूरानी चेहरे पर उभर आए जुल्म के फोड़े को कैसे फोड़ा जाए? दिमाग में यह सवाल लेकर अखबार के दफ्तर पहुंच गया। दफ्तर से श्रीनगर ब्यूरो में तैनात कानपुर के शैलेेंद्र शुक्ला को फोन लगावाया। इस घटना की जानकारी देते हुए कहा कि इस मामले की स्टोरी छपी है क्या? वह बोले अगर बिना एफआईआर के रिपोर्ट छप गयी तो दूसरे दिन सरकारी खंडन के साथ अलगाववादियों की धमकी से भी  जूझना पड़ेगा। जीवट व्यक्तित्व के मालिक शैलेंद्र शुक्ला ने कहा कि ऐसे मामले यहां बहुत होते हैं, खबर नहीं छपती है। उनके इस जवाब से दिल में बैचेनी होने लगी कि आखिर फिरदौस के घावों पर मरहम कैसे लगाया जाए? संपादक जी ने जम्मू-कश्मीर के हालात ठीक न होने के कारण बिना एफआईआर के आज या भविष्य में कोई खबर न करने की सीख दी। जेब में पड़े जाहिरा के उर्दू में लिखे प्रार्थनापत्र को देखते हुए फैसला लिया अब कल जम्मू-कश्मीर वूमेन कमीशन जाऊंगा।
क्रमश:

2 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

nice story

AMIT MISHRA ने कहा…

मान गए दिनेश दादा कोई जोड़ नहीं आपका। फिरदौस के नूरानी चेहरे पर जुल्मों का फोड़ा। मेरे तो कुछ ज्यादा ही दिल के करीब से होकर गुजर गया। आगे की कहानी जानने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं ............सादर

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