रोमिंग जर्नलिस्ट

मंगलवार, 17 मई 2011

जय हिंद सुनकर रेशमा को लग गया करंट

रोमिंग जर्नलिस्ट की रिपोर्ट 8
अमर उजाला जम्मू में मीटिंग की चाय पीने के बाद ही सीबीआई दफ्तर जाने की तैयारी के साथ दिमाग सवालों के उधेड़बुन में लग गया। जम्मू आने से पहले जम्मू-कश्मीर में सेक्स स्कैंडल का मामला काफी उछला था। दुनिया में खूबसूरती के साथ सेक्स की मंडी में कश्मीरी औरतों को हाट प्रोडक्ट बताकर बेचने के साथ धंधा कराने वाली सबीना के घर पर लोगों द्वारा हमला करने की खबर अखबारों में पढ़ी थी। विक्रम चौक से सिटी बस पकडक़र जम्मू रेलवे स्टेशन के पास मौजूद रेड हेड काम्पलेक्स में स्थित सीबीआई दफ्तर पंद्रह मिनट में पहुंच गया। गेट पर मौजूद गार्ड को परिचय दिया ..मैं अमर उजाला जम्मू में चीफ रिपोर्टर हूं, नाम है दिनेश चंद्र मिश्र। एसएसपी साहब से मिलना है। गार्ड ने जेब में मौजूद अमर उजाला बनारस के आईकार्ड में फोटो मिलाने के बाद तलाशी लेकर अंदर जाने दिया। पांच मिनट में गार्ड को परिचय और तलाशी से संतुष्टï करने के बाद सीबीआई जोनल आफिस के विजिटर गेट पर पहुंच गया। उस समय तक सीबीआई के एसएसपी का नाम भी नहीं मालूम था। अमर उजाला जम्मू टीम में शामिल क्राइम रिपोर्टर विद्यार्थी जी से जाने से पहले पूछा तो उनका कहना था, हमारा कभी जाना ही नहीं हुआ, नाम नहीं मालूम। खैर विजिटर गेट के पास पहुंचने के बाद दीवार पर नजर डाली तो एक बोर्ड दिखा, जिसमें एसएसपी के नाम के आगे .. .. गौड़ लिखा था। रिस्पेशन पर पहुंचा तो अपना परिचय देकर गौड़ साहब से मिलने की बात कही। कुछ ही देर में गौड़ साहब ने अंदर बुला लिया। राजस्थानी पंडित गौड़ साहब जितने व्यवहार कुशल थे, उतने ही धार्मिक थे। हर बात में माता रानी की कृपा कहने वाले गौड़ साहब को जब पता चला मैं बनारस से आया हूं तो उनको ऐसा लगा जैसे कोई काशी का बहुत बड़ा पंडित उनके घर आ गया हो। काशी की पांडित्य परंपरा की चर्चा करते-करते बीस मिनट बीत गए, तब तक चाय आ चुकी थी। चाय की चुस्कियों संग आने के मकसद पर चर्चा हुई तो जम्मू-कश्मीर के सेक्स स्कैंडल की चल रही सीबीआई जांच के बारे में पूछा तो पता चला कि सीबाईआई नईदिल्ली की क्राइम ब्रांच इसकी जांच खुद कर रही है, इसमें जोनल आफिस का कोई योगदान नहीं है। भष्टïाचार के मामले में उस समय नंबर एक पर मौजूद जम्मू-कश्मीर में कितने मामले इस समय दर्ज है? यह सवाल जब किया तो गौड़ साहब की पीड़ा छलक पड़ी। जम्मू-कश्मीर में मैदानी राज्यों से आने वाले लोगों को कितनी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है? वह जिस माहौल में काम करके आते हैं और यहां उन्हें जो माहौल मिलता है? उसमें कितना फर्क होता है? इसको लेकर चर्चा प्रारंभ हो गयी। गौड़ साहब ने पहले मुझसे पूछा आपने यूपी की राजधानी से लेकर देश की सांस्कृतिक राजधानी काशी तक में काम किया हैं, यहां और वहां में क्या फर्क है? दस दिन में जो फर्क महसूस किया था, उसको बताया, उसे सुनकर थोड़ा संतुष्टï हुए फिर कहने लगे आप अभी रियासत के सरकारी महकमों की कार्यप्रणाली से बखूबी वाकिफ नहीं है। भ्रष्टïाचार यहां जिस पैमाने पर फैला है, उस तरह किसी भी स्टेट में नजर नहीं आएगा। भ्रष्टï्राचार को लेकर दस मिनट तक चर्चा करने के बाद वह अपने विभाग का आफ द रिकार्ड हाल बताने लगे। सीबीआई जोनल आफिस में चौबीस इंस्पेक्टर है। भ्रष्टï्राचार को लेकर किसी भी इंस्पेक्टर ने पिछले दो साल के दौरान कोई मुकदमा ही नहीं दर्ज कराया है। इसके पीछे का कारण पूछने पर कहा कि अधिकांश इंस्पेक्टर जम्मू-कश्मीर के ही है, जो ऐसे मामले दर्ज होने के पहले ही बाहर ही बाहर ही सुलटा लेते हैं। सीबीआई में ऐसे इंस्पेक्टरों की संख्या दो तिहाई से ज्यादा है। पिछले दो सालों से कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। सीबीआई जम्मू के जोनल दफ्तर का अंदरुनी हाल जानने के बाद गौड़ साहब से खबर न बनाने का वादा करने का कोफ्त भी हुआ। डेढ़ घंटे की सीबीआई एसएसपी से मुलाकात में जम्मू-कश्मीर में उनके विभाग के साथ वहां रहने वाले बाहर के लोगों का हाल जानने के साथ इधर आने पर आते रहने का वादा करके वहां से चल दिया। सीबीआई दफ्तर से बाहर निकलने पर सोचा कि खबर तो मिली नहीं लेकिन एक अच्छे इंसान से दोस्ती के साथ ढेरों ज्ञान हासिल हुआ। खबर की खोज अधूरी रही, बाहर निकला तो जम्मू के स्थानीय संपादक प्रमोद भारद्वाज की वह बात याद आ गई कि रेल हेड काम्पलेक्स में बहुत से सरकारी दफ्तर है, कोई रिपोर्टर टच नहीं करता है। बाहर निकलकर थोड़ा सा ही चला था कि सामने भारतीय खाद्य निगम का दफ्तर हिंदी,उर्दू और अंग्रेजी में लिखा दिखाई दिया। दफ्तर में घुसने के बाद सीधे पहुंच गया महाप्रबंधक के पास। परिचय के बाद खाद्यान्न उत्पादन और भंडारण से बातचीत शुरू हुई और श्रीनगर में सर्दी में खाद्यान्न समस्या से निपटने के लिए किए गए इंतजाम की एक खबर मिली। कहने को सरकारी खबर थी, लेकिन हाथ में एक खबर आने पर कुछ संतोष जरूर हुआ। कश्मीर में जम्मू से खाद्यान्न की आपूर्ति के साथ बर्फबारी के समय  श्रीनगर से संपर्क टूट जाने की स्थिति में अनाज व अन्य जरूरी चीजों के बारे में एफसीआई महाप्रबंधक से मिली खबर लेकर ही आफिस लौटने का फैसला किया।
विक्रम चौक आने के लिए जम्मू रेलवे स्टेशन के सामने बस पकडऩे के लिए आ गया। बस में आकर बैठा ही था कि थोड़ी देर में एक कश्मीरी खूबसूरत महिला भी आकर बगल में बैठ गयी। बस को ठसाठस भरने के लिए ड्राइवर और कंडक्टर यूनिवर्सिटी,विक्रम चौक,गांधीनगर की आवाज लगा रहे थे। इसी बीच संपादक जी का मोबाइल पर फोन आ गया। हैलो-हाय की जगह जय हिंद बोलने की आदत के चलते जय हिंद बोला। जय हिंद सुनते ही बगल में बैठी कश्मीरी महिला इस तरह चौंक गई जैसे उसको करंट लग गया हो। प्रमोद जी को दिनभर की गतिविधियां बताने के बाद आफिस लौटने की बात बताकर पुन: जय हिंद बोलकर फोन रख दिया। फोन रखते ही उस महिला ने पूछा जनाब आप फोर्स में हैं क्या? जवाब दिया नहीं..अगला सवाल था फिर जय हिंद क्यो बोलते हैं? नमस्ते,सलाम,राम-राम से बेहतर मुझे अभिावादन में जय हिंद कहना लगता है,इसलिए जयहिंद बोलते हैं। पढ़ी-लिखी दिख रही इस महिला ने पूछा जनाब आप काम क्या करते हैं? बताया अखबार में रिपोर्टर हूं। यह सुनने के बाद जयहिंद की आवाज कानों में जाने से करंट का झटका खा रही यह महिला थोड़ी सामान्य हुई। अपना नाम रेशमा बताते हुए उसने बताया गर्वमेंट मेडिकल कालेज में वह नर्स है। बातचीत के दौरान उसने बताया मुझे एक न्यूज आपको देनी हैं, लेकिन उसकी चर्चा यहां नहीं कर सकती, आप मेडिकल कालेज आइएगा तब बताऊंगी। बस चल पड़ी थी उधर रेशमा से फोन नंबर का आदान-प्रदान होने के साथ अन्य बातें होती रही। रेशमा का जय हिंद सुनकर बिजली का झटका खाने से लेकर मेडिकल कालेज में खबर के लिए बुलाने का कारण दिमाग में एक अनसुलझा सवाल बन गया था। इस सोच-विचार के बीच विक्रम चौक आ गया। रेशमा से खुदा हाफिज करके चल दिया दफ्तर। श्रीनगर में बर्फबारी से निपटने के लिए खाद्यान्न आपूर्ति की व्यवस्था को लेकर खबर बनाने के बाद फैसला किया रेशमा से मिलने कल जाएंगे।
क्रमश:


8 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

nice story

satyendra ने कहा…

जारी रखें...आप लगातार पढ़े जा रहे हैं.

dinesh chandra mishra ने कहा…

satendra ji app pad rahe yeh yeh acchha laga

खबरों की दुनियाँ ने कहा…

अच्छी रिपोर्ट , शुभकामनाएं ।

PRITI ने कहा…

very nice story! isko padhane par aisa nahi lagta ki padh rahe hain balki aisa lagata hai ki us pal ko jee rahe hain . ise yun hi continue rakhie bahut utsukta rahati hai ki aage kya hua . GREAT STORY !!!

attitude ने कहा…

Jai Hind sir ji,
I read your blog first time its good story.
As you know there is a scarcity of the good news specially for Kashmir and the local news.

suresh ने कहा…

gud story sir

suresh ने कहा…

gud journalism journey

इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.

ब्लॉग आर्काइव