रोमिंग जर्नलिस्ट

मंगलवार, 17 मई 2011

लाहौर है नजदीक लखनऊ बहुत दूर

रोमिंग जर्नलिस्ट की रिपोर्ट 4
पाकिस्तान की सरहद पर तैनात जवानों की पत्नी जब चांद को देखकर उनकी लंबी उम्र मांगती हैं तो उनका दिल क्या कहता है? अमरउजाला जम्मू में काम करने से पहले घूमकर देखने समझने की संपादक प्रमोद भारद्वाज की सीख के कुछ घंटों के अंदर निकली खबर की कापी हाथ में थी। आसमां में दिखेगा चांद तो आवास में अक्स हेडिंग भी प्यारी बन गई थी। संपादक के आफिस में जाते ही पांच मिनट के भीतर में भी पीछे घुसा। चैंबर में बैठकर वह ई-मेल चेक करने में जुटे थे, इसी बीच में पहुंच गया उनके सामने। सर..अंदर आ जाए? हां आओ दिनेश। कहां घूमे आज। मैने बताया रघुनाथ मंदिर में भगवान के दर्शन करने गया था। दर्शन हो गया ठीकठाक.. जी सर। फिर बात चली बनारस के काशी विश्वनाथ मंदिर की। मैने कहा कि सर एक चीज समान मिली, पंडे जिस तरह वहां श्रद्घालुओं की जेब चूसने में लगे रहते हैं, उसी तरह यहां भी खेल है। धीर,गंभीर दिखने वाले संपादक के चेहरे पर इस बात से पहली बार मुस्कराहट की एक लकीर दिखी। रघुनाथ मंदिर के अलावा और कहीं नहीं गए? प्रश्नवाचक निगाह से इस सवाल को दागे भारद्वाज जी को बताया कि सर रघुनाथ बाजार ही टहला। करवाचौथ को लेकर खरीदारी करती महिलाओं की भीड़ खूब थी। वहां सुरक्षा मंदिर के बाहर कुछ जवानों से बातचीत होने लगी तो करवाचौथ पर केंद्रित हो गयी। जवानों के बातचीत एक खबर समझ में आयी। उसे आपको दिखाने के लिए बनाया हंू। यह कहते हुए न्यूज स्टोरी का प्रिंट संपादक जी को थमा दिया। हेडिंग और इंट्रो को पढऩे के बाद उनका कमेंट था..पहले दिन से ही फायरिंग स्टार्ट कर दिए। स्टोरी की तारीफ कराते हुए उसे सभी संस्करणों को भेजने के लिए कहा। स्टोरी आल एडिशन भेजने के बाद वह संपादकीय के सभी साथियों से कल की मीटिंग में मिलाने की बात कहकर फिर घूमने-टहलने को कहा। संपादक जी को प्रणाम करके आफिस से निकल दिया। सबेरे हल्का-फुल्का नाश्ता करके ही काम चला दिया था, शाम को पेट में कुछ सालिड की जरूरत महसूस होने लगी थी। आफिस से निकलते ही विक्रम चौक पर बालगोत्रा होटल पर नजर पड़ी। होटल के अंदर जाने के बाद दालफ्राई और रोटी का आर्डर दिया। दाल फ्राई के नाम पर राजमा की दाल और तंदूर की रोटी सामने आने के बाद पूछा अरहर की दाल नहीं मिलेगी क्या? तेरह-चौदह साल का गोरा चिट्ïटा कश्मीरी लडक़ा एक बार ऊपर से नीचे मासूमियत के साथ घूरता हुआ इस तरह देख रहा था मानो उसके समझ में कुछ नहीं आया। काउंटर पर बैठे होटल मालिक की तरफ इशारा करते हुए कहा कि उनसे पूछिए। भाई साहब अरहर की दाल नहीं मिलेगी क्या? इस सवाल को सुनकर होटल में पहले से खा रहे लोग भी चौंककर मेरी तरफ देखने लगे। माजरा समझ में आता इसके पहले ही होटल मालिक ने कहा कि साहब यहां तो आपकी यही दाल मिलेगी। खैर राजमा का अरसे बाद जायका रोटी संग लिया। रोटी संग राजमा से मजा नहीं आया तो हाफ प्लेट चावल भी मंगाया। राजमा चावल खाकर पेट भर गया था। होटल में पहुंचा तो शाम के सात बजे थे। मेरी निगाह उस शख्स को तलाश रही थी, जो पहले दिन जिंदा गोश्त का शौकीन समझकर आफर लेकर आया था। एक और खबर तराशने की आस में उस शख्स की खोज अधूरी रही, मालूम हुआ कि वह अपने घर गया है। होटल के कमरे में पहुंचकर टीवी देखते हुए कब नींद आ गई पता ही नहीं चला। सबेरे नौ बजे का समय रहा होगा, तभी बनारस से अमर उजाला के साथी आशुतोष त्रिपाठी का फोन आया। हैलो कहते ही वह बधाई देने लगा। पूछा किस बात की बधाई? भाई आपने जो जम्मू से स्टोरी का ग्रेनेड चलाया है, उसको बनारस के लोग भी देख रहे हैं। मजा आ गया खबर पढक़र। मोबाइल रोमिंग में होने के कारण बिल ज्यादा उठने की बात जब याद आयी तो उसको धन्यवाद कहकर फोन रख दिया। मोबाइल देखा तो कई एसएमएस आसमा में दिखेगा चांद,आवाज में दिखेगा अक्स की स्टोरी पर बधाई देने वाले भरे थे। फोन और एसएमएस से मिल रहे बधाई को देखते हुए मन अमर उजाला देखने को बैचेन हो गया। होटल से बाहर निकलकर अखबार देखा तो फ्रंट पेज पर बाइलाइन खबर पढक़र दिल खुश हो गया। काशी से कश्मीर आने को लेकर दिल,दिमाग में चल रहे सवाल और चिंता पता नहीं कहां चले गए। बनारस,लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर,पंजाब सहित कई हिस्सों से पत्रकार साथियों के फोन आए। कुछ बधाई दिए तो कुछ कहे काला पानी की सजा हुई है क्या जो वहां भेज दिए गए। सबको अपने हिसाब से जवाब देने का दौर चलता रहा। होटल से निकलकर आफिस की ओर कदम बढ़ाते हुए चल पड़ा। राह में तवी का पुल मिला तो उसपर खड़ा होने के बाद दिल के साथ हाथ जोडक़र प्रणाम करते हुए आर्शीवाद बनाए रखने की मन्नत मांगी। मीटिंग शुरू होने में अभी आधा घंटा का समय बाकी था, विक्रम चौक से पुलिस लाइन की सडक़ पर वक्त काटने के लिए बेमतलब टहलते हुए चलने लगा। एक किमी जाने के बाद एक माइल स्टोन देखकर ठहर गया। उस पर लिखा था लाहौर 287 किमी। इसको देखकर सोचने लगा यहां से लाहौर तो नजदीक है पर लखनऊ बहुत दूर है। वहां से उल्टे पांव आफिस लौट आया। संपादक जी ने मीटिंग में संपादकीय के साथियों से परिचय कराते हुए कहा कि यह है अपने नए साथी दिनेश चंद्र मिश्र। अखबार में बाइलाइन देखने के बाद अचरज भाव से मीटिंग में आए संपादकीय के तमाम साथी एक्स-रे की नजरों से देखने लगे। पहली खबर से प्रभावित हो चुके प्रमोद जी ने कहा कि काशी से जम्मू-कश्मीर आए है, आप लोग के साथ काम करेंगे,आप लोग इनका सहयोग कीजिएगा। और यह है योगेश शर्मा, अनिमेष शर्मा, योगेंद्र, विनोद कुमार, संजीव,राहुल। सबसे हाथ मिलाकर परिचय किया। एक सप्ताह तक घूमकर फिर काम करने के बारे में बताने की सलाह देने वाले संपादक जी ने अस्थायी रूप से फ्रंटपेज पर जाने वाली खबरों को देखने के साथ कोई बीट न देकर कहीं से भी खबर लाने की बात कही। पत्रकारिता का कीड़ा काटने के बाद जब से इस प्रोफेशन में आया जब से रिपोर्टिंग में ही हाथ अजमा रहा था, पहली बार डेस्क की बखूबी जिम्मेदारी मिली। नई जिम्मेदारी और नई चुनौती के बीच नए साथियों से भी नजदीकी बढ़ी। भोपाल के अनिमेष शर्मा और योगेंद्र सेन,गोरखपुर के राहुल के साथ आधा दर्जन से ज्यादा नए दोस्त पाकर खुश होने के साथ कल क्या करेंगे? इसी सोच में फिर मीटिंग के बाद आफिस से निकल पड़ा।
क्रमश:

1 टिप्पणी:

PRITI ने कहा…

taras raha hai mann phoolon ki nai gangh paane ko ,khili dhoop me khuli hawa me gaane muskaane ko !!

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